Satyapal Malik: पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, लंबे समय से बीमार थे; आरएमएल अस्पताल में ली अंतिम सांस
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का मंगलवार दोपहर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मलिक ने अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थे।
विस्तार
कंवर सिंह राणा ने बताया कि पूर्व राज्यपाल ने दोपहर 1 बजकर 12 बजे दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में अंतिम सांस ली।
"पूर्व गवर्नर चौधरी सत्यपाल सिंह मलिक जी नहीं रहें," reads a post from official X handle of Satypal Malik (@SatyapalMalik6 ). pic.twitter.com/C8YWx2Yo4t
— Press Trust of India (@PTI_News) August 5, 2025विज्ञापन
कौन थे सत्यपाल मलिक
बागपत के हिसावदा गांव निवासी सत्यपाल मलिक ने मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1965 में छात्र राजनीति में प्रवेश किया। 1966-67 में मलिक मेरठ कॉलेज के पहले छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल का गठन किया। 1974 के विधानसभा चुनाव में बीकेडी के टिकट पर बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे।
1975 में लोकदल के गठन के बाद उन्हें अखिल भारतीय महामंत्री नियुक्त किया गया। 1980 में लोकदल के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इस बीच उनकी लोकदल के नेताओं से खटपट बढ़ गई, जिसके बाद 1984 में मलिक ने कांग्रेस की सदस्यता ली।
1986 में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा भेजे गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नियुक्त किए गए थे। 1987 में बोफोर्स घोटोले से दुखी होकर राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया और जनमोर्चा में शामिल हो गए। 1988 में जनता दल में शामिल हुए और 1991 तक जनता दल के प्रवक्ता और सचिव रहे। 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से सांसद चुने गए।
जम्मू-कश्मीर के दसवें और अंतिम राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक
जम्मू-कश्मीर के इतिहास में 23 अगस्त 2018 को सत्यपाल मलिक ने प्रदेश के दसवें और अंतिम राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले राजनीतिज्ञ थे। इससे पहले इस संवेदनशील राज्य की कमान हमेशा पूर्व सैन्य अधिकारियों, नौकरशाहों के हाथों में रही थी।| वर्ष | जिम्मेदारी |
| 1974-77 | विधायक, बागपत |
| 1980-84 | राज्यसभा सांसद |
| 1986-89 | राज्यसभा सांसद |
| 1989-91 | सांसद, अलीगढ़ |
| 1990 | केंद्रीय राज्य मंत्री |
| 2017 | राज्यपाल, बिहार |
| 2018 – | राज्यपाल, ओडिशा (अतिरिक्त प्रभार) |
| 2018 – | राज्यपाल, जम्मू और कश्मीर |
| 2019 – | राज्यपाल, गोवा |
| 2020 – | राज्यपाल, मेघालय |
किसान आंदोलनों से जुड़े रहे सत्यपाल मलिक की सबसे बड़ी पहचान उनकी भाषण शैली है। मेरठ कॉलेज से उनके भाषण देने की कला के चलते ही युवाओं ने उन्हों हाथों हाथ लिया। चौ. चरण सिंह भी उनकी भाषण कला के कायल थे। भाजपा में रहते हुए उन्हें किसान प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई।
वाक्या साल 1990 का है। हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया। उनकी बात नहीं सुनी गई तो केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा दे दिया था।
हिसावदा गांव के किसान बुध सिंह के घर 24 जुलाई 1946 को सत्य पाल मलिक का जन्म हुआ। मलिक के बचपन में ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी माता जगनी देवी ने किया था। उनके जीवन पर मां की छाप रही।
सत्यपाल मलिक की पत्नी इकबाल मलिक पर्यावरणविद् हैं। उनका बेटा देव कबीर ग्राफिक डिजाइनर और पुत्रवधू निविदा चंद्रा हैं। 1980 से ही मलिक का परिवार दिल्ली में रहता है।
पूर्व राज्यपाल श्री सत्यपाल मलिक जी के निधन का समाचार बेहद दुःखद है।
— Atishi (@AtishiAAP) August 5, 2025
उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सादगी, स्पष्टवादिता और जनहित के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए हमेशा एक अलग पहचान बनाई। उनका जाना भारतीय राजनीति की एक सधी हुई आवाज़ का शांत हो जाना है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को… pic.twitter.com/UyT29ETSRr