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दिल्ली : कार्बन क्रेडिट से मेट्रो ने छह साल में अर्जित किए 19.5 करोड़
Mon, 27 Sep 2021 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 27 Sep 2021 03:38 AM IST
सार
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उत्सर्जन में कटौती से राजस्व में बढ़ोतरी।
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delhi metro
- फोटो : PTI
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विस्तार
सभी परिवहन विकल्पों से सुलभ दिल्ली मेट्रो ने स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामले में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ कार्बन क्रेडिट से करोड़ों का राजस्व भी अर्जित किया है। उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को हासिल करते हुए छह वर्षों (2012-2018) में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने उत्सर्जन में कटौती कर 35.5 लाख कार्बन क्रेडिट की बिक्री से 19.5 करोड़ रुपये की कमाई की।
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जलवायु परिवर्तन के लिहाज से तय मानकों के मुताबिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिल्ली मेट्रो अग्रणी रहा है। इसके लिए मेट्रो ने ऊर्जा बचत पर केंद्रित परियोजनाओं को सिरे चढ़ाया, ताकि कार्बन उत्सर्जन में कमी से पर्यावरण को स्वच्छ रखने सहित कार्बन क्रेडिट भी अर्जित हो सके। 2007 में दिल्ली मेट्रो को क्लीन डेवलपमेंट मेकेनिज्म (सीडीएम) के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने पंजीकृत किया। क्योटो प्रोटोकॉल के तहत ग्रीन हाउस गैस ऑफसेट मेकेनिज्म के तहत उच्च आय देशों में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को निम्न या मध्यम आय वाले देशों से इन गैसों के उत्सर्जन को कम करने वाली परियोजनाओं से कार्बन क्रेडिट खरीदने की अनुमति मिलती है। वैश्विक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों का एक हिस्सा है।
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एक टन उत्सर्जन में कमी के बराबर है एक सीईआर
किसी भी परियोजना में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल से कार्बन या ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को क्रेडिट किया जा सकता है। इसे सर्टिफाइड एमिशन रिडक्शन (सीईआर) कहा जाता है। इनकी खरीद बिक्री की जा सकती है। एक सीईआर यानी एक टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कटौती है। जलवायु प्रणाली में खतरनाक मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए स्थापित उद्यम यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन एंडक्लाइमेंट चेंज (यूएनएफसीसीसी) ने भी मेट्रो की इस पहल को सराहा है।
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मेट्रो में काफी कम है कार्बन फुट प्रिंट
मेट्रो में यात्रा करने वाले यात्रियों के कार्बन परिवहन के अन्य माध्यमों की तुलना में कार्बन फुट प्रिंट की तुलना में काफी कम होते हैं। दिल्ली मेट्रो ने अभी तक चार प्रोजेक्ट के तहत रीजनरेटिव ब्रेकिंग प्रोजेक्ट, मॉडल शिफ्ट प्रोजेक्ट, एमआरटीएस प्रोग्राम ऑफ एक्टिविटीज प्रोजेक्ट और यूएनएफसीसीसी के साथ सौर परियोजनाओं को पंजीकृत करवाया है। 2014में दिल्ली मेट्रो प्रतिष्ठित ‘गोल्ड स्टेंडर्ड फाउंडेशन’ स्विटजरलैंड के साथ पंजीकृत होकर विश्व का सबसे पहला मेट्रो और रेलवे सिस्टम भी बन गया है।
अब तक 29.05 करोड़ रुपये की क्रेडिट बेच चुका है दिल्ली मेट्रो
वर्ष 2015 से दिल्ली मेट्रो देश के अलग-अलग मेट्रो प्रणाली के जरिये कंसल्टेंसी सेवाएं भी मुुहैया कर रही है। वर्ष 2012-18 के दौरान अलग-अलग परियोजनाओं से संयुक्त तौर पर ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 3.55 मिलियन यानी 35.5 लाख कार्बन क्रेडिट में कटौती की गई। कार्बन क्रेडिट की बिक्री से डीएमआरसी को 19.5 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। शुरुआत से अब तक डीएमआरसी को कार्बन क्रेडिट की बिक्री से कुल 29.05 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। 2012 में 9.55 करोड़ रुपये के कार्बन क्रेडिट की बिक्री की थी।
कार्बन क्रेडिट का बढ़ रहा है कारोबार
कार्बन क्रेडिट एक परमिट है। इसके तहत किसी भी प्रतिष्ठान को एक निश्चित मात्रा में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की अनुमति दी जाती है। एक टन कार्बन डाइ ऑक्साइड के बराबर होने वाले उत्सर्जन के बराबर एक क्रेडिट है। इसे प्रदूषण फैलाने वाली कंपनियों को क्रेडिट किया जा सकता है, ताकि प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। क्रेडिट अधिक होने पर कार्बन क्रेडिट का कारोबार किया जा सकता है।