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दिल्ली दंगा: हाईकोर्ट ने कहा- स्वीकार नहीं है उमर खालिद का आपत्तिजनक भाषण, पुलिस से मांगा जवाब
Fri, 22 Apr 2022 03:11 PM IST
सुशील कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Fri, 22 Apr 2022 03:11 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की प्रतिक्रिया मांगी है। उमर खालिद की जमानत की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा दिया गया भाषण स्वीकार्य नहीं है।
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उमर खालिद।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि उमर खालिद द्वारा दिया गया भाषण अप्रिय है और प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं है। यही भाषण फरवरी 20 के दिल्ली दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश के लिए उसके खिलाफ एक मामले का आधार बनता है। फिलहाल अदालत ने उमर की जमानत याचिका पर पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि भाषण में कुछ बयान अपराध है और यह धारणा दी कि केवल एक संस्था ने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। अदालत ने पुलिस को तीन दिन में स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न जमानत स्वीकार की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अप्रैल तय की है।
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सुनवाई के दौरान उमर की ओर से पेश वकील ने अमरावती में दिए भाषणों को पढ़ते हुए बताया कि उनके भाषण में ऐसा कुछ नहीं है, जिसमें दंगों के लिए लोगों को उकसाया गया। खालिद के भाषण कि जब आपके पूर्वज दलाली कर रहे थे टिप्पणी पर अदालत ने कहा यह अप्रिय है। इन अभिव्यक्तियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्या आपको नहीं लगता कि वे लोगों को उकसाते हैं? अदालत ने कहा स्वतंत्र भाषण के खिलाफ कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आप क्या कह रहे हैं।
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पीठ ने कहा यह अपने आप में आपत्तिजनक है। आपने इसे कम से कम पांच बार कहा... क्या आपको नहीं लगता कि यह समूहों के बीच धार्मिक उत्तेजना को बढ़ावा देता है? क्या गांधी जी ने कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया था? क्या भगत सिंह ने इस भाषा को अंग्रेजों के खिलाफ इस्तेमाल किया था? क्या यही है गांधी जी ने हमें सिखाया कि हम लोगों और उनके पूर्वज के खिलाफ ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर सकते हैं?
भगत सिंह का अनुकरण करना मुश्किल
अदालत ने पूछा कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अप्रिय बयानों तक विस्तारित हो सकती है और क्या भाषण धार्मिक समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने के खिलाफ कानून को आकर्षित नहीं करता है। पीठ ने कहा भगत सिंह का आह्वान करना बहुत आसान है, लेकिन उनका अनुकरण करना मुश्किल है। वह एक सज्जन थे, जिन्हें अंतत: फांसी दी गई थी। वह वहीं रहे वह भाग नहीं गए। आप कह रहे हैं कि आप भी दंगों में नहीं थे।
हिंसा भड़कने के समय खालिद मौजूद नहीं था
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने कहा कि अमरावती भाषण नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हुई हिंसा के संदर्भ में दिया गया था। उन्होंने कहा कि भाषण में कोई प्रतिक्रिया नहीं है और उन्होंने हिंसा को उकसाया नहीं। वरिष्ठ वकील ने इस आधार पर जमानत मांगी कि हिंसा भड़कने के समय खालिद मौजूद नहीं था उससे कोई पैसा नहीं वसूला गया। अदालत ने कहा कि साजिश के अपराध के लिए आरोपी को अपराध के स्थान पर उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।
आरोप प्रथम दृष्टया सही
वरिष्ठ वकील ने अदालत को सूचित किया कि वर्तमान प्राथमिकी भाषण के कुछ हिस्सों पर आधारित है। अदालत ने कहा हम हैरान नहीं हैं। खालिद और कई अन्य पर फरवरी 2020 के दंगों के मास्टरमाइंड होने के मामले में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हो गए थे। निचली अदालत ने 24 मार्च को खालिद को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह मानने के लिए उचित आधार हैं कि उसके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही थे।