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Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा - जज को करनी होगी वैवाहिक कानूनों की रिफ्रेशर ट्रेनिंग

Sun, 30 Nov 2025 07:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 30 Nov 2025 07:55 PM IST
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Delhi High Court said that judges will have to undergo refresher training on matrimonial laws.
पति की ओर से हिंदू मैरिज एक्ट की धारा के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका
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पर सुनाया फैसलाअमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट जज की वैवाहिक मामलों की सुनवाई में गंभीर कानूनी गलतियों को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने जज को वैवाहिक कानूनों में व्यापक रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा करने का निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी भूलें न हों। अदालत ने जज की कानूनी समझ की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता को कमजोर करता है।


यह फैसला न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने एक तलाक मामले में सुनाया। मामले में पति ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी। लेकिन फैमिली कोर्ट जज ने सुनवाई में कई गंभीर चूक कीं। जज ने गैर-मौजूद धारा 28ए (स्पेशल मैरिज एक्ट) का हवाला देकर तलाक का डिक्री जारी कर दिया, जबकि याचिका हिंदू मैरिज एक्ट के तहत थी। अदालत ने पाया कि जज ने पत्नी को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया। पहले ही सुनवाई के दिन पत्नी के साक्ष्य पेश करने का अधिकार बंद कर दिया गया और जल्दबाजी में अंतिम फैसला सुना दिया गया। बेंच ने टिप्पणी की, हमें आश्चर्य हुआ कि फैमिली कोर्ट जज ने जो फैसला सुनाया, उसमें स्पेशल मैरिज एक्ट की ऐसी धारा का सहारा लिया गया जो स्टेच्यूट बुक में मौजूद ही नहीं है। इसी आधार पर तलाक का डिक्री दिया गया। अदालत ने विवादास्पद फैसले को रद्द कर मामले को फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज को डी नोवो (नए सिरे से) सुनवाई के लिए भेज दिया। साथ ही, जज को दिल्ली ज्यूडिशियल अकादमी के तहत ट्रेनिंग लेने का आदेश दिया, जिसमें वैवाहिक कानूनों, प्रावधानों और क्षेत्राधिकार की सीमाओं पर फोकस होगा।
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गौरव
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