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Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 साल की दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की दी इजाजत, जानें कोर्ट का आदेश
Thu, 26 Jan 2023 06:40 PM IST
Digvijay Singh
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Thu, 26 Jan 2023 06:40 PM IST
सार
दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश एक महिला की याचिका पर आई है जिसमें उन्होंने अपनी 14 साल की बेटी का गर्भपात कराने की अनुमति मांगी है। अपने 22 पन्नों के फैसले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि उसे अपने निवास स्थान के पास एक सरकारी स्कूल में एडमिशन मिले।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता पर मातृत्व की जिम्मेदारी थोपना उसे सम्मान के साथ जीने के मानवाधिकार से वंचित करने जैसा होगा। ऐसे मामले जहां गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो। उच्च न्यायालय ने कहा कि पीड़िता को उस व्यक्ति के बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करना जिसने उसका यौन उत्पीड़न किया, इसका परिणाम अस्पष्ट दुख होगा, और ऐसे मामले जहां यौन हमले का परिणाम गर्भावस्था में होता है, वह और भी दर्दनाक होता है क्योंकि ऐसे दुखद क्षण की छाया हर दिन बनी रहती है।
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अदालत को बताया गया कि पीड़िता के परिवार के सदस्य निर्माण श्रमिक हैं और उसका यौन उत्पीड़न किया गया था, जबकि उसकी मां काम के लिए बाहर गई थी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने नाबालिग की मां की सहमति के बाद और उसकी जांच करने वाले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद गर्भपात (एमटीपी) की याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने लड़की को गर्भावस्था के चिकित्सीय समापन के उद्देश्य से शुक्रवार को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा।
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दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश एक महिला की याचिका पर आई है जिसमें उन्होंने अपनी 14 साल की बेटी का गर्भपात कराने की अनुमति मांगी है। अपने 22 पन्नों के फैसले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि उसे अपने निवास स्थान के पास एक सरकारी स्कूल में एडमिशन मिले।
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