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दिल्ली सरकार ने कहा अभी कोरोना की स्थिति ग्रे एरिया में, 40 प्रतिशत बेड आरक्षित करना जरूरी
Wed, 13 Jan 2021 07:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 13 Jan 2021 07:31 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : एएनआई
दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली में कोरोना की स्थिति अभी भी ग्रे एरिए में हैं। आगामी त्योहोरों और कोविड-19 के नए स्ट्रेन को देखते हुए हम अभी भी ग्रे एरिए में हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में कम से कम 40 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित रखने की जरूरत है और 18 जनवरी को समीक्षा बैठक में अगला निर्णय लिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुनवाई 19 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।न्यायमूर्ति नवीन चावला ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोविड-19 मरीजों के लिए 33 निजी अस्पतालों में आईसीयू बिस्तरों के आरक्षण पर समीक्षा बैठक की रिपोर्ट पेश करे। वहीं सरकार ने अदालत को बताया कि कोविड-19 आईसीयू बिस्तरों का आरक्षण घटाकर 40 फीसदी तक कर दिया है।
अदालत एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एएचपी) की याचिका पर सुनवाई कर रही है। जिसने हालही में 33 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बिस्तर कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करने के निर्णय को चुनौती दी थी।
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सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की और से पेश अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल संजय जैन ने कहा कि एक भी गैर कोविड-19 रोगी ने अदालत में आकर यह नहीं बताया है कि 80 फीसदी आरक्षण के कारण अस्पताल में नउसे चिकित्सा देने से इंकार किया गया। उन्होंने कहा, %%हम इसे घटाकर 40 फीसदी तक ले आए हैं।
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हाईकोर्ट ने सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुनवाई 19 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी।न्यायमूर्ति नवीन चावला ने दिल्ली सरकार से कहा कि कोविड-19 मरीजों के लिए 33 निजी अस्पतालों में आईसीयू बिस्तरों के आरक्षण पर समीक्षा बैठक की रिपोर्ट पेश करे। वहीं सरकार ने अदालत को बताया कि कोविड-19 आईसीयू बिस्तरों का आरक्षण घटाकर 40 फीसदी तक कर दिया है।
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अदालत एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एएचपी) की याचिका पर सुनवाई कर रही है। जिसने हालही में 33 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बिस्तर कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करने के निर्णय को चुनौती दी थी।
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सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की और से पेश अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल संजय जैन ने कहा कि एक भी गैर कोविड-19 रोगी ने अदालत में आकर यह नहीं बताया है कि 80 फीसदी आरक्षण के कारण अस्पताल में नउसे चिकित्सा देने से इंकार किया गया। उन्होंने कहा, %%हम इसे घटाकर 40 फीसदी तक ले आए हैं।
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12 सितंबर 2020 का निर्णय (33 निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बिस्तर कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित करना) तर्कसंगत निर्णय था और इस बारे में सूचित किया गया था। यह स्वैच्छिक निर्णय नहीं था और इससे अस्पतालों को वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है।
वहीं याची के अधिवक्ता महेंद्र सिंह द्वारा बहस के दौरान इस बात के उल्लेख पर कि आईसीयू में बिस्तर खाली रखे गए और वित्तीय नुकसान का सामना कर रहे अस्पतालों को सरकार की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया।
वहीं याची के अधिवक्ता महेंद्र सिंह द्वारा बहस के दौरान इस बात के उल्लेख पर कि आईसीयू में बिस्तर खाली रखे गए और वित्तीय नुकसान का सामना कर रहे अस्पतालों को सरकार की ओर से कोई भुगतान नहीं किया गया।