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राजस्व की कमी बताकर निगम को पैसा देने से नहीं बच सकती सरकार: हाईकोर्ट
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार से कहा कि राजस्व में कमी बताकर वह निगमों को राशि का भुगतान करने से नहीं बच सकती। कोर्ट ने कहा कि नगर निगम कर्मियों को वेतन का भुगतान करने के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि निगमों के पास पैसा ही नहीं है। पीठ ने इस याचिका पर अगली सुनवाई 10 अगस्त के लिए सूचीबद्ध की है।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया। दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा पीठ से कहा कि सरकार का राजस्व कम हो रहा है, लेकिन यथोचित कदम उठाए जाएंगे।
पीठ ने कहा यह उत्तर नहीं दिया जा सकता कि सरकार के पास राजस्व की कमी है। इसका समाधान खोजिए और कोर्ट को बताइए। पीठ ने उन्हें निर्देश दिया कि अगली तारीख पर उचित निर्देशों के साथ आएं। निगमों को समय पर राशि का भुगतान होना चाहिए ताकि निगम कर्मियों को समय पर वेतन मिल सके।
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इस संबंध में उत्तर दिल्ली नगर निगम की ओर से याचिका दायर करके दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई। निगम ने आरोप लगाया है कि 30 जून को समाप्त हुई पहली तिमाही में स्वच्छता शहरी विकास मद के लिए मंजूर की गई 90.60 करोड़ रुपये की राशि अभी जारी नहीं की गई है और इसी मद के तहत दूसरी तिमाही में भी 181 करोड़ रुपये अभी बकाया हैं।
निगम ने याचिका में कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सफाई कर्मचारियों को वेतन के भुगतान और स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए होना है। लिहाजा सरकार को जल्द राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए जाएं।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया। दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा पीठ से कहा कि सरकार का राजस्व कम हो रहा है, लेकिन यथोचित कदम उठाए जाएंगे।
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पीठ ने कहा यह उत्तर नहीं दिया जा सकता कि सरकार के पास राजस्व की कमी है। इसका समाधान खोजिए और कोर्ट को बताइए। पीठ ने उन्हें निर्देश दिया कि अगली तारीख पर उचित निर्देशों के साथ आएं। निगमों को समय पर राशि का भुगतान होना चाहिए ताकि निगम कर्मियों को समय पर वेतन मिल सके।
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इस संबंध में उत्तर दिल्ली नगर निगम की ओर से याचिका दायर करके दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई। निगम ने आरोप लगाया है कि 30 जून को समाप्त हुई पहली तिमाही में स्वच्छता शहरी विकास मद के लिए मंजूर की गई 90.60 करोड़ रुपये की राशि अभी जारी नहीं की गई है और इसी मद के तहत दूसरी तिमाही में भी 181 करोड़ रुपये अभी बकाया हैं।
निगम ने याचिका में कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सफाई कर्मचारियों को वेतन के भुगतान और स्वच्छता संबंधी कार्यों के लिए होना है। लिहाजा सरकार को जल्द राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए जाएं।