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दिल्ली : डॉ. डीएन शिवपुरी अवार्ड से नवाजे गए डॉ. जीएल शर्मा
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नई दिल्ली। विज्ञान के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए डॉ. जीएल शर्मा को डॉ. डीएन शिवपुरी अवार्ड से सम्मानित किया गया। दिल्ली स्थित जीनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायलॉजी) में कार्यरत होते हुए उन्होंने मानव संक्रामक रोग पर शोध किया। यह अवार्ड इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड इम्यूनोलॉजी द्वारा दिया जाता है।
पूरे भारत से डॉ. जीएल शर्मा को इस सम्मान के लिए चयनित किया गया। उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ से मेडिकल पेरेसाइटोलॉजी विषय में विशेषज्ञता के साथ पीएचडी की उपाधि सन 1983 में प्राप्त की। इसके बाद वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) में वैज्ञानिक के पद पर चयनित हुए।
बकौल शर्मा, संक्रामक रोगों की श्रृंखला में एस्पर्जिलोसिस नामक रोग, जिसका संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में निदान और उपचार चुनौती भरा बना हुआ है, के निदान के लिए उपयुक्त अभिकर्मकों (राजेन्ट्स) का विकास किया और एक एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेन्ट एस्से नामक टेस्ट विकसित किया, जिससे रोगियों को लाभ हुआ है। एस्पर्जिलस के इम्म्युनोप्रोटिओम का गहन अध्ययन किया, जिसकी सहायता से रोगजनक (पैथोजन) की पुनर्संयोजित (रेकॉम्बीनैंट) प्रोटीन तैयार किया, जिसका उपयोग एस्पर्जिलोसिस के विशिष्ट निदान और उसके विरुद्ध वैक्सीन बनाने में किया जा सकेगा।
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पूरे भारत से डॉ. जीएल शर्मा को इस सम्मान के लिए चयनित किया गया। उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ से मेडिकल पेरेसाइटोलॉजी विषय में विशेषज्ञता के साथ पीएचडी की उपाधि सन 1983 में प्राप्त की। इसके बाद वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) में वैज्ञानिक के पद पर चयनित हुए।
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बकौल शर्मा, संक्रामक रोगों की श्रृंखला में एस्पर्जिलोसिस नामक रोग, जिसका संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में निदान और उपचार चुनौती भरा बना हुआ है, के निदान के लिए उपयुक्त अभिकर्मकों (राजेन्ट्स) का विकास किया और एक एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेन्ट एस्से नामक टेस्ट विकसित किया, जिससे रोगियों को लाभ हुआ है। एस्पर्जिलस के इम्म्युनोप्रोटिओम का गहन अध्ययन किया, जिसकी सहायता से रोगजनक (पैथोजन) की पुनर्संयोजित (रेकॉम्बीनैंट) प्रोटीन तैयार किया, जिसका उपयोग एस्पर्जिलोसिस के विशिष्ट निदान और उसके विरुद्ध वैक्सीन बनाने में किया जा सकेगा।
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