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दिल्ली पानी के लिए पूरी तरह पड़ोसी राज्यों पर निर्भर: संयंत्रों के लिए एक बूंद भी कच्चा पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता
Tue, 13 Jul 2021 01:28 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 13 Jul 2021 01:28 AM IST
सार
दिल्ली के पास अपने स्तर पर रैनीवेल और ट्यूबेवलों के माध्यम से 90 एमजीडी कच्चा पानी उपलब्ध है और इनके पानी में क्लोरिन डालकर आपूर्ति किया जाता है, जबकि अधिकतर ट्यूबेवलों का पानी पीने योग्य नहीं है।
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आप नेता राघव चड्ढा द्वारा ट्वीट की गई यमुना की फोटो
- फोटो : @raghav_chadha
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विस्तार
राजधानी पानी के मामले में पूरी तरह पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली की पानी की मांग, शोधन एवं उपलब्धता में उसके पानी की 10 प्रतिशत भी हिस्सेदारी नहीं है। इतना ही नहीं, दिल्ली अपने जल शोधक संयंत्रों को एक बूंद भी कच्चा पानी नहीं उपलब्ध करा रही है। इस तरह पड़ोसी राज्यों के पानी की कटौती करते ही दिल्ली में पानी को लेकर हाहाकर मच जाता है। आजकल हरियाणा से यमुना नदी में कम पानी छोड़े जाने पर मचा हंगामा इसी कड़ी का हिस्सा है।
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दिल्ली के पास अपने स्तर पर रैनीवेल और ट्यूबेवलों के माध्यम से 90 एमजीडी कच्चा पानी उपलब्ध है और इनके पानी में क्लोरिन डालकर आपूर्ति किया जाता है, जबकि अधिकतर ट्यूबेवलों का पानी पीने योग्य नहीं है। इस तरह दिल्ली जल बोर्ड के समस्त नौ जल शोधक संयंत्रों को दिल्ली एक बूंद भी कच्चा पानी उपलब्ध नहीं कराती है। लिहाजा ये संयंत्र कच्चे पानी के मामले में पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है।
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गंग नहर, यमुना नदी व पश्चिम यमुना नहर से इतना अधिक पानी नहीं आता है कि किसी एक जगह से पानी की कटौती होने पर उसकी पूर्ति की जा सके। किसी भी एक जगह से पानी कम आने पर उससे जुड़े संयंत्रों में पानी का उत्पादन प्रभावित हो जाता है। ऐसा ही आजकल यमुना नदी में पानी कम आना शुरू होते ही उससे जुड़े संयंत्रों में देखा जा सकता है।
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इन संयंत्रों को उत्तराखंड से गंग नहर, हरियाणा से यमुना नदी व पश्चिम यमुना नहर के माध्यम से करीब एक हजार एमजीडी कच्चा पानी मिलता है और 850 एमजीडी पानी साफ होता है, जबकि दिल्ली में 1040 एमजीडी पानी की मांग है। लिहाजा पानी की मांग पूरी कराने एवं पानी उपलब्ध कराने में दिल्ली की 10 प्रतिशत भी भागीदारी नहीं है।
गंग नहर से मिलने वाले करीब 300 एमजीडी कच्चे पानी को सोनिया विहार और भगीरथी जल शोधक संयंत्र में इस पानी को साफ करने में करीब 50 एमजीडी पानी खराब हो जाता है। इसी तरह यमुना नदी के तहत दिल्ली को तीन सौ एमजीडी पानी उपलब्ध होता है और इस पानी को चंद्रावल, वजीराबाद व ओखला जल शोधक संयंत्रों में साफ करने के दौरान करीब 50 एमजीडी पानी बेकार हो जाता है। वहीं पश्चिम यमुना नहर के माध्यम से करीब चार सौ एमजीडी पानी मिलता है। इस पानी को हैदरपुर, नांगलोई, द्वारका एवं बवाना जल शोधक संयंत्र में साफ किया जाता है। इस दौरान करीब 65 एमजीडी पानी पीये योग्य नहीं रहता है।