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दिल्ली एम्स का हाल : पीड़ित और परिजन मंत्रीजी को वो बताना चाहते हैं जो सब जानते हैं...

Fri, 24 Sep 2021 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 24 Sep 2021 05:51 AM IST
सार

ओपीडी आने वाले मरीजों ने बताई आपबीती। नए मरीज के लिए आसान नहीं इलाज ले पाना। उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा दिल्ली से भी ओपीडी में पहुंचे मरीजों ने लगाई गुहार। एम्स में नहीं है कोई शिकायत निवारण केंद्र, परेशान होने पर मायूस होकर लौटते हैं मरीज।

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Delhi AIIMS condition: Victims and relatives want to tell the minister what everyone knows...
एम्स दिल्ली - फोटो : फाइल

विस्तार

साहब, सुना है आजकल मंत्री जी एम्स का दौरा कर रहे हैं। मैंने मोबाइल पर पढ़ा था। मैं भी मंत्री जी से कुछ कहना चाहता हूं, क्या आप मेरी आवाज वहां तक पहुंचा सकते हैं? मंत्री जी से कहना, एम्स में अपॉइंटमेंट के लिए दो दिन इंतजार करना पड़ता है। यहीं ओपीडी के बाहर मैं दो दिन से फुटपाथ पर इसलिए सो रहा हूं ताकि अपॉइंटमेंट मिलने के बाद पापा को दिखा सकूं। 

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बृहस्पतिवार सुबह को मुझे अपॉइंटमेंट भी मिल गया लेकिन साहब बुरा तब लगा जब पूरा दिन इधर से उधर धक्के खाने के बाद भी सीनियर डॉक्टर ने पापा को नहीं देखा, उन्होंने कहा-पहले फाइल बनवाओ। जब फाइल बनवाने पहुंचा तो कभी इस काउंटर तो कभी उस काउंटर, कभी लंबी लंबी लाइन तो कभी दूसरी बिल्डिंग में जाकर जांच। पूरा दिन इसी में निकल गया और शाम साढ़े चार बजे डॉक्टर ने बुलाकर कहा कि अगली डेट ले लो, फिर सीनियर डॉक्टर को दिखाना, तुम्हारी फाइल बन गई है। 
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यह कहना है प्रशांत विहार निवासी प्रताप कुमार का। बृहस्पतिवार को शिव बहादुर दो रात और तीन दिन एम्स में गुजारने के बाद अपने पापा को लेकर वापस घर रवाना हुए। शिव ने कहा, साहब अब मेरी हिम्मत नहीं है कि दोबारा यहां आकर अपॉइनमेंट ले सकूं। अगर मजबूरी न हो तो यहां झांकना भी पसंद न करूं। 
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ठीक इसी तरह की कहानी उत्तर प्रदेश से 19 वर्षीय वैभव को लेकर ओपीडी पहुंचे राहुल वशिष्ठ ने सुनाई। उनके भाई को खून बनना और प्लेट्लेट्स की कमी होने की शिकायत है। अब तक वे एम्स में ही 35 हजार रुपये की जांच करा चुके हैं और उत्तर प्रदेश से चार बार दिल्ली आकर कभी सैंपल तो कभी जांच करा चुके हैं। दो बार अपॉइनमेंट भी ले लिया है लेकिन अभी भी न तो डॉक्टर ने कोई दवा दी है और न ही ये बताया कि मरीज को परेशानी क्या है? 

इसका इलाज क्या होगा? इसे भर्ती करेंगे भी या नहीं? ओपीडी में महिला जूनियर डॉक्टर बैठी होती हैं जो पहले तो डांटती हैं और फिर उनसे प्रार्थना करो तो कुछ ही बात बताना पसंद करती हैं, जैसे मैंने उनसे कोई कर्ज मांग लिया हो। राहुल और प्रताप जैसी ऐसी अनगिनत कहानियां दिल्ली एम्स की ओपीडी में रोज ही देखने को मिल रही हैं। ओपीडी ब्लॉक नया शुरू होने के बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं है। 


कोई शिकायत निवारण केंद्र भी नहीं
तीमारदारों का कहना है कि एम्स में कहीं भी कोई शिकायत निवारण केंद्र नहीं है। ऐसे में अगर किसी को कोई परेशानी होती भी है तो इधर उधर चक्कर काटने के बाद वह धक-हारकर वापस घर चला जाता है। यहां मरीजों की सुनवाई के लिए शिकायत निवारण केंद्र होना चाहिए, अगर यहां है तो उसके बारे में जगह जगह जानकारी भी होनी चाहिए। 

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