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मेरठ हत्याकांड

Wed, 08 May 2019 04:19 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 08 May 2019 04:19 AM IST
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मेरठ हत्याकांड
मेरठ के लिए विशेष....साइड स्टोरी
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दर्दनाक मौत देकर खौफ कायम करना चाहते थे दोषी
-मृतक इंद्रपाल ने 1996 में मदन भैया के खिलाफ लड़ा था चुनाव
-पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी व भाई को उम्रकैद का मामला
धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली। मेरे भाई को दर्दनाक मौत देकर सतेंद्र व हरेंद्र खौफ कायम करना चाहते थे ताकि उनके सामने कोई चुनाव में लड़ने की कोशिश न कर सके। उनका अपराध व राजनीति से पुराना नाता रहा है। यह दलीलहत्या के दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग करते हुए मृतक इंद्रपाल ढाका के भाई वकील अमरपाल सिंह ढाका ने कोर्ट में रखी। हालांकि अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा न सुनाकर आजीवन कारावास से ही दंडित किया।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सतीश कुमार अरोड़ा के समक्ष अमरपाल ढाका ने सजा पर बहस करते हुए कहा कि सतेंद्र व हरेंद्र उसके भाई को दर्दनाक मौत देना चाहते थे इसलिए उसे11 गोलियां मारी गई थीं। वह चाहते थे इंद्रपाल के सिर में गोली मारकर उसे आसान मौत दे सकते थे। वह खड़ी गाड़ी में बैठा था और विरोध करने की स्थिति में नहीं था। ढाका ने पोस्टमोर्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि दोषियों ने सबसे पहले इंद्रपाल के हाथ में गोली मारी थी ताकि वह अपनी रक्षा में राइफल न उठा सके। इसके बाद उसके सीने व पेट में गोली मारी गई। वह इस वारदात के जरिए लोगों में खौफ कायम करना चाहते थे।
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मृतक के भाई ने कोर्ट को बताया कि इंद्रपाल ने एम फिल में मेरठ विश्वविद्यालय टॉप किया था और पीएचडी प्रवेश परीक्षा में भी वह पहले नंबर पर आया था। वह अपने परिवार व देश के लिए कुछ कर पाता उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। शिकायतकर्ता का कहना था कि उसके भाई की हत्या राजनीति के कारण व नेताओं के इशारे पर हुई थी। उसका कहना था कि इंद्रपाल ने 1996 में खेकड़ा से मदन भैया के सामने विधायक का चुनाव लड़ा था और उसे 17 हजार वोट मिले थे। केस की सुनवाई के दौरान अमरपाल को सुरक्षा मिली थी, लेकिन मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद सुरक्षा वापस ले ली गई थी। उसने प्रयागराज हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद उसे दोबारा सुरक्षा प्रदान की गई थी।
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