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केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल में महिला डॉक्टर से मारपीट, हंगामा
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आरएमएल अस्पताल में महिला डॉक्टर से मारपीट, हंगामा
-आपातकालीन विभाग में मरीजों को छोड़ भागे डॉक्टर
-विरोध में डाक्टरों ने चिकित्सा अधीक्षक का किया घेराव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में मंगलवार को एक महिला डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद हंगामा हो गया। इसके विरोध में डॉक्टरों ने आनन फानन में आपातकालीन वार्ड छोड़ दिया। घटना की जानकारी पूरे अस्पताल में फैलते ही डॉक्टर एकत्रित हो गए और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। इसी बीच अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में डॉक्टर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी का घेराव करने पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन की ओर से केस दर्ज कराने की मांग करने लगे। पूरे घटनाक्रम के दौरान मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को वार्ड से ही लौटा दिया गया।
जानकारी के अनुसार मयूर विहार निवासी राखी सिर में दर्द की शिकायत के कारण चार दिन पहले आरएमएल में भर्ती हुई थी। उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज को आराम न मिलने के कारण वह बार-बार डॉक्टरों से शिकायत कर रहे थे, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। मंगलवार को राखी की भाभी अस्पताल आईं और उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की बोलने लगी। डॉक्टरों की सहमति पर परिजन जब राखी को लेकर जा रहे थे, तब एक जूनियर रेजीडेंट डाक्टर बाहर आई और मरीज से जुड़े कागज परिजनों को सौंपे। इसी दौरान किसी बात पर राखी की भाभी जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर से अभद्र व्यवहार करने लगी। आरोप है कि उसने डॅाक्टर के साथ मारपीट भी की। इस घटना से नाराज डॉक्टरों ने चिकित्सा अधीक्षक से कार्रवाई करने की मांग की। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत एफआईआर दर्ज करा दी। अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सुबोध कुमार ने बताया कि देर शाम तक सभी डॉक्टरों ने अपनी ड्यूटी संभाल ली थी।
मरीज हुए परेशान
पूर्वी दिल्ली के मंडावली निवासी 56 वर्षीय एसएन मिश्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले आरएमएल अस्पताल में उनकी न्यूरो सर्जरी हुई थी। पहले सर्जरी के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब उन्हें यूरिन की परेशानी है। इस वजह से वह मंगलवार को अस्पताल आए, लेकिन डॉक्टरों के हंगामे की जानकारी देते हुए सुरक्षा गार्ड ने उन्हें कहीं और जाकर इलाज कराने की सलाह दी। उस दौरान आपातकालीन विभाग में उन्हें कोई भी वरिष्ठ डॉक्टर नहीं मिला।
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बालाजी अस्पताल के डॉक्टरों पर गलत ऑपरेशन के आरोप
-पैनल पर होने के बाद भी चार लाख रुपये का बिल भी थमाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के बालाजी अस्पताल के डॉक्टरों पर दिल्ली नगर निगम के ड्राइवर ने गलत उपचार करने के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को उन्होंने अस्पताल में हंगामा करते हुए पुलिस को भी शिकायत दी। हालांकि अस्पताल की ओर से जबाव नहीं मिला है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम में अधिकारी राजेंद्र कौशिक के ड्राइवर नरेला निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि उनकी मां सरजो देवी(75) को पित्त की थैली का ऑपरेशन कराने के लिए 23 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया था। निगम के पैनल पर होने के कारण उन्हें अपनी मां को अस्पताल में दाखिला कराना आसान हुआ, लेकिन आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी मां को डॉक्टरों ने एक नली के सहारे छोड़ दिया, जिसमें से रक्त बह रहा था। डॉक्टरों ने पहले इसे सामान्य बताया और घर भेज दिया, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने पर 28 मार्च को अस्पताल बुलाया और फिर से दाखिल किया। आरोप है कि डॉक्टरों ने उनकी मां का पहले दिन कोई उपचार नहीं किया, लेकिन हंगामा करने पर दोबारा ऑपरेशन करने का फैसला लिया। इसके बाद अस्पताल ने उसे 4 लाख रुपये का बिल थमा दिया। रविंद्र का आरोप है कि अभी उनकी मां की स्थिति नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण पेट में संक्रमण फैल गया है। इसी के चलते उन्होंने दिल्ली पुलिस से मदद मांगी थी। उधर अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस घटना को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली।
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-आपातकालीन विभाग में मरीजों को छोड़ भागे डॉक्टर
-विरोध में डाक्टरों ने चिकित्सा अधीक्षक का किया घेराव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में मंगलवार को एक महिला डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद हंगामा हो गया। इसके विरोध में डॉक्टरों ने आनन फानन में आपातकालीन वार्ड छोड़ दिया। घटना की जानकारी पूरे अस्पताल में फैलते ही डॉक्टर एकत्रित हो गए और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे। इसी बीच अस्पताल के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में डॉक्टर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी का घेराव करने पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन की ओर से केस दर्ज कराने की मांग करने लगे। पूरे घटनाक्रम के दौरान मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को वार्ड से ही लौटा दिया गया।
जानकारी के अनुसार मयूर विहार निवासी राखी सिर में दर्द की शिकायत के कारण चार दिन पहले आरएमएल में भर्ती हुई थी। उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि मरीज को आराम न मिलने के कारण वह बार-बार डॉक्टरों से शिकायत कर रहे थे, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। मंगलवार को राखी की भाभी अस्पताल आईं और उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की बोलने लगी। डॉक्टरों की सहमति पर परिजन जब राखी को लेकर जा रहे थे, तब एक जूनियर रेजीडेंट डाक्टर बाहर आई और मरीज से जुड़े कागज परिजनों को सौंपे। इसी दौरान किसी बात पर राखी की भाभी जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर से अभद्र व्यवहार करने लगी। आरोप है कि उसने डॅाक्टर के साथ मारपीट भी की। इस घटना से नाराज डॉक्टरों ने चिकित्सा अधीक्षक से कार्रवाई करने की मांग की। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत एफआईआर दर्ज करा दी। अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर सुबोध कुमार ने बताया कि देर शाम तक सभी डॉक्टरों ने अपनी ड्यूटी संभाल ली थी।
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मरीज हुए परेशान
पूर्वी दिल्ली के मंडावली निवासी 56 वर्षीय एसएन मिश्रा ने बताया कि कुछ दिन पहले आरएमएल अस्पताल में उनकी न्यूरो सर्जरी हुई थी। पहले सर्जरी के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अब उन्हें यूरिन की परेशानी है। इस वजह से वह मंगलवार को अस्पताल आए, लेकिन डॉक्टरों के हंगामे की जानकारी देते हुए सुरक्षा गार्ड ने उन्हें कहीं और जाकर इलाज कराने की सलाह दी। उस दौरान आपातकालीन विभाग में उन्हें कोई भी वरिष्ठ डॉक्टर नहीं मिला।
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बालाजी अस्पताल के डॉक्टरों पर गलत ऑपरेशन के आरोप
-पैनल पर होने के बाद भी चार लाख रुपये का बिल भी थमाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के बालाजी अस्पताल के डॉक्टरों पर दिल्ली नगर निगम के ड्राइवर ने गलत उपचार करने के आरोप लगाए हैं। मंगलवार को उन्होंने अस्पताल में हंगामा करते हुए पुलिस को भी शिकायत दी। हालांकि अस्पताल की ओर से जबाव नहीं मिला है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम में अधिकारी राजेंद्र कौशिक के ड्राइवर नरेला निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि उनकी मां सरजो देवी(75) को पित्त की थैली का ऑपरेशन कराने के लिए 23 मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया था। निगम के पैनल पर होने के कारण उन्हें अपनी मां को अस्पताल में दाखिला कराना आसान हुआ, लेकिन आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उनकी मां को डॉक्टरों ने एक नली के सहारे छोड़ दिया, जिसमें से रक्त बह रहा था। डॉक्टरों ने पहले इसे सामान्य बताया और घर भेज दिया, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने पर 28 मार्च को अस्पताल बुलाया और फिर से दाखिल किया। आरोप है कि डॉक्टरों ने उनकी मां का पहले दिन कोई उपचार नहीं किया, लेकिन हंगामा करने पर दोबारा ऑपरेशन करने का फैसला लिया। इसके बाद अस्पताल ने उसे 4 लाख रुपये का बिल थमा दिया। रविंद्र का आरोप है कि अभी उनकी मां की स्थिति नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की लापरवाही के कारण पेट में संक्रमण फैल गया है। इसी के चलते उन्होंने दिल्ली पुलिस से मदद मांगी थी। उधर अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस घटना को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली।