फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Covid patients should be admitted in hospital in second or third week says Delhi AIIMS

दिल्ली: एम्स की सलाह- दूसरे से तीसरे सप्ताह में कोरोना मरीज को भर्ती करना जरूरी

Wed, 18 Aug 2021 07:21 PM IST
प्राची प्रियम परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 18 Aug 2021 07:21 PM IST
सार

दूसरी लहर में दो हजार से ज्यादा गंभीर मरीज भर्ती हुए जिनमें से 19 फीसदी की मौत हो गई। एम्स के डॉक्टरों ने अध्ययन में निष्कर्ष निकाला कि 14 दिनों के बाद कोरोना गंभीर बन रहा है।
 

विज्ञापन
Covid patients should be admitted in hospital in second or third week says Delhi AIIMS
एम्स दिल्ली

विस्तार

नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों का मानना है कि दूसरे से तीसरे सप्ताह के बीच कोरोना मरीजों को भर्ती करना जरूरी है क्योंकि इस अवधि के दौरान मरीजों की हालत में सबसे ज्यादा बदलाव देखने को मिलता है। डॉक्टरों ने एक चिकित्सीय अध्ययन के जरिए यह निष्कर्ष निकाला है। 

विज्ञापन


इस अध्ययन में दूसरी लहर के दौरान एम्स में भर्ती हुए दो हजार मरीजों की केस हिस्ट्री पर समीक्षा की गई थी। अध्ययन के दौरान इनमें से 19 फीसदी मरीजों की मौत तक हुई। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में 14 दिन बाद कोरोना गंभीर स्थिति में बदलने लगता है। 
विज्ञापन


मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित इस अध्ययन में 2080 मरीजों को शामिल किया गया जिन्हें इस साल अप्रैल से जून माह के बीच भर्ती किया गया था। इनमें से 19.50 फीसदी मरीजों की मौत दर्ज की गई है जोकि अब तक की स्थिति में सबसे अधिक है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद एक मरीज को कम से कम आठ दिन रुकना पड़ा था। इन मरीजों में हर आयु वाले शामिल थे। एम्स के आठ विभागों ने मिलकर यह अध्ययन किया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि अध्ययन के दौरान 89 मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर हो चुकी थी। जबकि अधिकांश 342 मरीजों की मौत रेस्पिरेटरी हाइपोक्सिया के चलते हुई। इन मरीजों में संक्रमण काफी तेजी से फैल चुका था और समय रहते इन्हें उपचार नहीं मिल सका। वहीं 28 मरीज ऐसे भी थे जिन्हें संक्रमण के दौरान हार्ट अटैक आने से मौत हुई। 

डॉक्टरों ने अध्ययन में लिखा है कि अस्पताल में जल्दी प्रवेश देने से मृत्युदर को कम किया जा सकता है। हालांकि संक्रमण होने के पहले सप्ताह के दौरान मृत्युदर को कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने यहां तक कहा है कि टीकाकरण के जरिए मृत्युदर को रोका जा सकता है लेकिन अगर संक्रमण होने के बाद मरीज में एआरडीएस विकसित होता है तो उसे अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है। इस स्थिति में मरीज की हालत काफी बिगड़ने लगती है और हर पल मौत की आशंका बढ़ने लगती है। 


कोरोना के साथ किडनी फेल होने से बढ़ी मौतें
अध्ययन में पता चला है कि कोरोना संक्रमण के गंभीर होने के साथ ही मरीजों में किडनी फेल भी हुई हैं जिसके चलते सबसे ज्यादा मृत्युदर इन मरीजों में दर्ज की गई है। 188 ऐसे मरीजों की मौत एम्स में दूसरी लहर के दौरान दर्ज की गई थी। वहीं रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, आइवरमेक्टिन जैसी दवाएं देने के बाद भी मौत की आशंका को कम नहीं कर सके। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed