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कोरोना महामारी: सीबीएसई को फीस जमा न करवाने वाले छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश
Mon, 29 Nov 2021 06:59 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 29 Nov 2021 06:59 PM IST
सार
अदालत ने सीबीएसई व स्कूल प्रशासन को बच्चे की परीक्षा के नतीजे सील बंद कवर में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार, सीबीएसई और संबंधित स्कूल को नोटिस जारी जवाब मांगा है।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को दसवीं कक्षा एक छात्र को 30 नवंबर को शुरू होने वाली आगामी प्रथम-टर्म परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान कर दी। छात्र के माता-पिता समय पर उसकी स्कूल फीस का भुगतान करने में असफल रहे थे।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने सीबीएसई व स्कूल प्रशासन को बच्चे की परीक्षा के नतीजे सील बंद कवर में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार, सीबीएसई और संबंधित स्कूल को नोटिस जारी जवाब मांगा है।
अदालत ने सीबीएसई को बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में अधिसूचनाओं को रिकॉर्ड में रखने का भी निर्देश दिया गया है,वहीं स्कूल प्रशासन को बच्चे से संबंधित फीस का विवरण देने का निर्दे दिया है।
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अदालत ने कहा परीक्षाएं 30 नंवबर से शुरू हो रही है ऐसे में याचिकाकर्ता को कुछ अंतरिम संरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। बच्चे के पिता ने कोविड माहामारी के कारण फीस जमा नहीं करवाई थी और स्कूल ने उसे ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी।
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न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने सीबीएसई व स्कूल प्रशासन को बच्चे की परीक्षा के नतीजे सील बंद कवर में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा अदालत ने मामले में दिल्ली सरकार, सीबीएसई और संबंधित स्कूल को नोटिस जारी जवाब मांगा है।
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अदालत ने सीबीएसई को बोर्ड परीक्षाओं के संबंध में अधिसूचनाओं को रिकॉर्ड में रखने का भी निर्देश दिया गया है,वहीं स्कूल प्रशासन को बच्चे से संबंधित फीस का विवरण देने का निर्दे दिया है।
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अदालत ने कहा परीक्षाएं 30 नंवबर से शुरू हो रही है ऐसे में याचिकाकर्ता को कुछ अंतरिम संरक्षण प्रदान करना आवश्यक है। बच्चे के पिता ने कोविड माहामारी के कारण फीस जमा नहीं करवाई थी और स्कूल ने उसे ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं दी।
अप्रैल और अगस्त 20 में शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गएसर्कुलर का उल्लंघन का तर्क देकर बच्चे को परीक्षा से रोक दिया गया था। सीबीएसई व स्कूल प्रशासन ने अदालत को बताया कि बच्चा ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल नहीं हुआ, इसलिए उसकी उपस्थिति 10-11 प्रतिशत से कम हो गई है, हालांकि नियम के लिए यह 75 प्रतिशत से अधिक होना आवश्यक है। इस वजह से उन्हें सीबीएसई की परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया।
इस संबंध में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से शिकायत की गई, जिन्होंने स्कूल से इस मामले को सहानुभूतिपूर्वक उठाने और बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बच्चे को दसवीं कक्षा की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने को कहा था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
अदातल ने स्पष्ट किया कि यदि पिता वर्तमान फीस बकाया जमा करता है, तो स्कूल उसे कक्षा में बैठने की अनुमति देने पर विचार करेगा ताकि अंतिम परीक्षाओं के लिए ऐसी ही स्थिति न हो।
इस संबंध में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया से शिकायत की गई, जिन्होंने स्कूल से इस मामले को सहानुभूतिपूर्वक उठाने और बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बच्चे को दसवीं कक्षा की परीक्षा में बैठने की अनुमति देने को कहा था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
अदातल ने स्पष्ट किया कि यदि पिता वर्तमान फीस बकाया जमा करता है, तो स्कूल उसे कक्षा में बैठने की अनुमति देने पर विचार करेगा ताकि अंतिम परीक्षाओं के लिए ऐसी ही स्थिति न हो।