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प्रचंड गर्मी से परेशान जानवर: चिड़ियाघर में की गई कूलर और पंखों की व्यवस्था, खीरा, ककड़ी और तरबूज का स्वाद चख रहे वन्यजीव

Fri, 10 Jun 2022 05:15 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 10 Jun 2022 05:15 AM IST
सार

लगातार गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के खाने में बदलाव किया गया है। इसके तहत मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों के खाने का मेन्यू घटाने के साथ फल व सब्जियों को शामिल किया गया है। शाकाहारी वन्यजीवों को ऐसे खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न हो। इसमें खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, टमाटर व हरे पत्ते वाली सब्जियां भी शामिल हैं।

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Coolers and fans arranged for zoo animals troubled by the scorching heat
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में पारा चढ़ने से इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी परेशान हैं। इस कड़ी में दिल्ली के चिड़ियाघर में वन्यजीवों के खाने के मेन्यू में बदलाव किया गया है। साथ ही बाड़े में कूलर व पंखों की व्यवस्था की गई है, जिससे वन्यजीव चुभन भरी गर्मी में ठंडी हवा में आराम फरमा सकें।

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चिड़ियाघर के एक अधिकारी के मुताबिक, लगातार गर्मी को देखते हुए वन्यजीवों के खाने में बदलाव किया गया है। इसके तहत मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों के खाने का मेन्यू घटाने के साथ फल व सब्जियों को शामिल किया गया है। शाकाहारी वन्यजीवों को ऐसे खाद्य पदार्थ दिए जा रहे हैं, जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न हो। इसमें खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, टमाटर व हरे पत्ते वाली सब्जियां भी शामिल हैं।
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पानी में ग्लूकोज घोलकर दिया जा रहा
वर्तमान में चिड़ियाघर में शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू व लोमड़ी समेत अन्य मांसाहारी वन्यजीव हैं। इन वन्यजीवों को दोपहर और रात के खाने में मीट दिया जाता है। अधिकारी ने बताया कि गर्मी अधिक होने की वजह से इन वन्यजीवों की मीट की मात्रा में कमी की गई है। वहीं, जानवरों के शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पानी में ग्लूकोज घोलकर दिया जा रहा है।
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बाड़ों में लगे स्प्रिंकलर
गर्मी से राहत दिलाने के क्रम में बाड़ों में स्प्रिंकलर की व्यवस्था की गई है। साथ ही वन्यजीवों को सुबह-शाम नहलाया जा रहा है। वहीं, हाथी और बाघ के बाड़ों में तालाब में पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे दोपहर में अधिक गर्मी लगने पर वन्यजीव तालाब में बैठ सकें। अधिकारी का कहना है कि गर्मियों में हाथी खुद को ठंडा रखने के लिए कीचड़ में नहाना पसंद करता है। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा तालाब को कीचड़ के हिसाब से तैयार किया जाता है।  


मौसम के हिसाब से बदलती है जीवनशैली
अधिकारी का कहना है कि मौसम के हिसाब से वन्यजीवों की जीवनशैली बदलती है। इस कड़ी में खाने में बदलाव किया जाता है। सर्दी में मांसाहारी वन्यजीवों को अधिक मांस देने के साथ उनके लिए हीटर की व्यवस्था की जाती है, वहीं शाकाहारी वन्यजीवों को गुड़, खिचड़ी, केले, टमाटर, पालक समेत अन्य हरी सब्जियां दी जाती हैं।

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