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जेएनयू में पीएचडी सीटों पर विवाद: 711 में से केवल 38 एसटी अभ्यर्थियों को दाखिला, एससी आयोग ने लिया संज्ञान
Tue, 03 Nov 2026 02:23 AM IST
Digvijay Singh
पीटीआई, दिल्ली
पीटीआई, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 03 Nov 2026 02:23 AM IST
सार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने पीएचडी कार्यक्रमों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) सीटों के आरक्षण संबंधी शिकायतों पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन किया है। यह कदम छात्र संगठनों से प्राप्त अभ्यावेदनों के बाद उठाया गया है।
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पीएचडी की सीटों पर रार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने पीएचडी कार्यक्रमों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) सीटों के आरक्षण संबंधी शिकायतों पर गौर करने के लिए एक समिति का गठन किया है। यह कदम छात्र संगठनों से प्राप्त अभ्यावेदनों के बाद उठाया गया है। 26 अक्तूबर की एक अधिसूचना के अनुसार, कुलपति ने इस पांच सदस्यीय समिति को बनाया है।
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समिति का नेतृत्व स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन विवेक कुमार कर रहे हैं। इसमें विश्वविद्यालय के एसटी संपर्क अधिकारी और समान अवसर कार्यालय के मुख्य सलाहकार शामिल हैं। उप रजिस्ट्रार (कानूनी) और एससी/एसटी/ओबीसी सेल के सहायक रजिस्ट्रार भी इसके सदस्य हैं। आवश्यकता पड़ने पर समिति को अतिरिक्त सदस्यों को शामिल करने का अधिकार है। यह गठन 2026-27 शैक्षणिक सत्र के पीएचडी प्रवेश में आरक्षण मानदंडों के कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच हुआ है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने समिति में छात्रों के प्रतिनिधित्व की मांग की है।
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आरक्षण में कथित अनियमितताएं
छात्र संगठनों ने पीएचडी प्रवेश में आरक्षण नियमों के पालन में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने एसटी सीटों के आवंटन में बड़ी कमी बताई है। एसएफआई के अनुसार, 711 पीएचडी सीटों में से 7.5 फीसदी आरक्षण की आवश्यकता थी। इसके मुकाबले केवल 38 एसटी उम्मीदवारों को सीटें आवंटित की गईं। इससे 15 एसटी सीटों की कथित कमी हुई है।
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आयोग ने लिया संज्ञान
एसएफआई ने अनुसूचित जाति (एससी) और विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) श्रेणियों में भी आवंटन विसंगतियों को चिह्नित किया है। जेएनयूएसयू उपाध्यक्ष गोपिका बाबू की शिकायत के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है। आयोग अब इन कथित अनियमितताओं की जांच करेगा।