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दिल्ली: लेबर केयर गाइड के जरिए 16 गुना तक सिजेरियन प्रसूति में आई कमी, सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों का अध्ययन
Tue, 23 Nov 2021 01:47 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 23 Nov 2021 01:47 AM IST
सार
इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पापुलेशन स्टडीज के एक अध्ययन में शोद्यार्थियों ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में 59 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
देश में सिजेरियन डिलीवरी कम करने के लिए सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने नई लेबर केयर गाइड पर काम करते हुए सफलता हासिल की है। अस्पताल के डॉक्टरों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों पर जब चिकित्सीय अध्ययन किया तो उसमें 16 गुना तक सिजेरियन के मामलों में कमी देखने को मिली है।
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डॉक्टरों के अनुसार जिन महिलाओं को नई लेबर केयर गाइड (एलसीजी) के तहत उपचार दिया गया उनमें सिजेरियन डिलीवरी होने की आशंका 1.8 फीसदी थी। जबकि दूसरे समूह में यह 17.3 फीसदी से भी अधिक दर्ज की गई। इसके अलावा अस्पताल के डॉक्टरों ने एक और चिकित्सीय अध्ययन में पुष्टि की है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना महामारी के चलते तनाव के मामले 30 से बढ़कर 90 फीसदी तक पहुंच गए हैं।
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नई दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल की डॉ. दिव्या पांडे के अनुसार दिसंबर 2020 में डब्ल्यूएचओ ने एलसीजी को जारी किया था। अभी तक इसे लेकर बहुत अधिक जागरुकता की आवश्यकता है। अस्पताल के डॉक्टरों ने 230 गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन का फैसला लिया था लेकिन सभी जांच के बाद 115 महिलाओं का चयन करने के बाद अध्ययन शुरू किया गया। इन महिलाओं को दो अलग अलग समूह में रखा गया और इनमें से एक समूह को व्यवस्थित दिशा निर्देशों के तहत उपचार दिया गया। जबकि दूसरे समूह की महिलाओं को पारंपरिक रुप से उपचार दिया। इस दौरान दोनों समूह में सिजेरियन डिलीवरी को लेकर काफी बड़ा अंतर देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि नए दिशा निर्देशों का जिले से लेकर उप स्वास्थ्य केंद्र इत्यादि पर ध्यान देने से देश में सिजेरियन डिलीवरी को काफी कम किया जा सकता है।
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दिल्ली में आयोजित 43 वें वार्षिक एओजीडी सम्मेलन में डॉक्टरों ने इस अध्ययन को प्रस्तुत भी किया। दरअसल बीते कुछ वर्षों में भारत में सिजेरियन डिलीवरी का सिलसिला काफी तेजी से बढ़ा है। स्थिति यह है कि हर पांचवीं गर्भवती महिला की प्रसूति सिजेरियन के जरिए की जा रही है। इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पापुलेशन स्टडीज के एक अध्ययन में शोद्यार्थियों ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में 59 हजार से ज्यादा गर्भवती महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हो रही है। यह संख्या हर साल हजारों में बढ़ रही है। इतना ही नहीं इस अध्ययन में यह भी कहा है कि प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती होने वाली हर दूसरी गर्भवती महिला को सिजेरियन ही कराना पड़ता है। जबकि सरकारी अस्पतालों में यह संख्या 11 फीसदी के आसपास है।
महिलाओं को कोरोना से लग रहा है डर
सफदरजंग अस्पताल के अध्ययन में डॉक्टरों को पता चला है कि 243 महिलाओं में से 80 फीसदी ने शिशु को जन्म देने के बाद चिंता ग्रस्त होने की पुष्टि की है। वहीं 90 फीसदी महिलाओं ने कोविड की वजह से मन में डर रहने की बात भी स्वीकार की है। अस्पताल की वरिष्ठ डॉ. सुमित्रा बचानी ने बताया कि पहली लहर के दौरान डर ने गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को अत्यधिक प्रभावित किया। महिलाओं को डर था कि यह बीमारी उनके अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगी। भले ही महिलाओं को शारीरिक लक्षणों के लिए इलाज किया गया था, लेकिन उनके मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया।