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Delhi News: ‘रंग संस्कार’ बाल रंग महोत्सव में नन्हें कलाकारों का शानदार प्रदर्शन
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बाल कलाकारों ने नाटकों से दिया देशप्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के समवेत सभागार में रविवार को आयोजित ‘रंग संस्कार’ बाल रंग महोत्सव में बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का अनूठा संगम देखने को मिला। इसे उड़ान-द सेंटर ऑफ थिएटर आर्ट एंड चाइल्ड डेवलपमेंट की तरफ से प्रस्तुत किया गया था।
वहीं इस आयोजन को आईजीएनसीए का सहयोग मिला। महोत्सव में नन्हें कलाकारों ने देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव का उद्घाटन आईजीएनसीए के कलादर्शन विभाग की अध्यक्ष डॉ. ऋचा कंबोज की मौजूदगी में प्रख्यात रंगकर्मी और साहित्यकार मालविका जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वहीं, कार्यक्रम का संचालन और संयोजन उड़ान के निदेशक संजय टुटेजा के मार्गदर्शन में हुआ। एक माह तक चली बाल रंगमंच कार्यशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त बच्चों ने पांच नाटकों और एकल अभिनय की प्रस्तुति देकर अपनी अभिनय क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
वहीं, महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘वत्सले मातृभूमे’ नाटक रहा, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित था। रंगकर्मी योगेश पंवार के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में झुग्गी-झोपड़ियों से आए बच्चों ने अपने संवेदनशील अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके अलावा अभिषेक राणा निर्देशित ‘ताजमहल का टेंडर’ और ‘बाप रे बाप’, हिमांशी के निर्देशन में मंचित ‘आजादी की कहानी’ और ‘जंगल की पुकार’ ने सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं भाव बंसल के एकल अभिनय ‘बढ़ता स्कूल बैग’ ने बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के समवेत सभागार में रविवार को आयोजित ‘रंग संस्कार’ बाल रंग महोत्सव में बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का अनूठा संगम देखने को मिला। इसे उड़ान-द सेंटर ऑफ थिएटर आर्ट एंड चाइल्ड डेवलपमेंट की तरफ से प्रस्तुत किया गया था।
वहीं इस आयोजन को आईजीएनसीए का सहयोग मिला। महोत्सव में नन्हें कलाकारों ने देशभक्ति, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर आधारित प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव का उद्घाटन आईजीएनसीए के कलादर्शन विभाग की अध्यक्ष डॉ. ऋचा कंबोज की मौजूदगी में प्रख्यात रंगकर्मी और साहित्यकार मालविका जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वहीं, कार्यक्रम का संचालन और संयोजन उड़ान के निदेशक संजय टुटेजा के मार्गदर्शन में हुआ। एक माह तक चली बाल रंगमंच कार्यशालाओं में प्रशिक्षण प्राप्त बच्चों ने पांच नाटकों और एकल अभिनय की प्रस्तुति देकर अपनी अभिनय क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
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वहीं, महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘वत्सले मातृभूमे’ नाटक रहा, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित था। रंगकर्मी योगेश पंवार के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक में झुग्गी-झोपड़ियों से आए बच्चों ने अपने संवेदनशील अभिनय से दर्शकों को भावुक कर दिया। इसके अलावा अभिषेक राणा निर्देशित ‘ताजमहल का टेंडर’ और ‘बाप रे बाप’, हिमांशी के निर्देशन में मंचित ‘आजादी की कहानी’ और ‘जंगल की पुकार’ ने सामाजिक जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं भाव बंसल के एकल अभिनय ‘बढ़ता स्कूल बैग’ ने बच्चों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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