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दिल्ली दंगा : आदेश का पालन न करने पर पुलिस पर 25 हजार रुपये जुर्माना

Mon, 18 Oct 2021 07:18 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 07:18 PM IST
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25 thousand rupees fine on the police for not following the order
नई दिल्ली। अदालत ने फरवरी 2020 के दंगे मामले में आदेश का पालन न कर आरोपी को ‘अनावश्यक रूप से प्रताड़ित’ किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिस पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि इन मामलों में पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को निजी हस्तक्षेप करने के लिए बार-बार दिए गए निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया गया। अदालत ने कहा जुर्माना जरूरी है ताकि पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप के निर्देश बहरे कानों पर पड़ें।
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कड़कड़डूमा अदालत के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अरुण कुमार गर्ग ने शिकायतों को अलग करने और सभी सातों आरोपियों के मामले में समान रूप से आगे जांच करने के लिए एक अर्जी दायर करने में देरी के लिए पुलिस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने कहा इस अदालत ने डीसीपी (उत्तर पूर्व), संयुक्त पुलिस आयुक्त (पूर्वी रेंज) और पुलिस आयुक्त को उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े मामलों में उनके निजी हस्तक्षेप करने के बार-बार निर्देश दिए, लेकिन ऐसा लगता है कि इन सभी निर्देशों को नजरअंदाज किया गया है।
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अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगे से संबंधित इन मामलों की ठीक से जांच और तत्परता से सुनवाई के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण पेश करने का पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना को 12 अक्तूबर को निर्देश दिया था। अदालत ने केन्द्रीय गृह सचिव को मामले की जांच करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाने और इस राशि को उनके वेतन से काटने का भी निर्देश दिया था।
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इस मामले की आगे जांच जारी रहने के आधार पर बार-बार सुनवाई स्थगित करने के पुलिस के अनुरोध के कारण उन पर यह जुर्माना लगाया गया था। सितंबर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सवाल किया था कि दिल्ली के भजनपुरा इलाके के तीन अलग-अलग मंडलों में अलग-अलग तारीखों पर हुई दंगों की पांच घटनाओं को एक प्राथमिकी में क्यों जोड़ा गया? उन्होंने अकील अहमद की शिकायत को अलग करने का निर्देश दिया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने बताया कि अहमद की शिकायत अलग कर दी गई लेकिन जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट में उसकी शिकायत को अलग करने के बारे में कोई जिक्र नहीं था। अदालत ने कहा आईओ के शिकायत को अलग करने और मामले में आगे की जांच की अनुमति दी जाती है।
हालांकि इसमें देरी होने से आरोपियों का अनावश्यक उत्पीड़न हुआ, जिसके लिए 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।
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