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Delhi: जीरो वेस्ट कॉलोनी ही विकल्प, साफ होगी मिट्टी, हवा और जल तो बेहतर होगा कल

Tue, 06 Jun 2023 03:40 AM IST
Digvijay Singh आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 06 Jun 2023 03:40 AM IST
सार

दिल्ली की सारी कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाकर प्रदूषण के जहर से बचा जा सकता है। 350 कॉलोनियां मौजूदा समय जीरो वेस्ट कॉलोनी बन गई हैं। निगम ने साल भर में सबको जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाने का लक्ष्य रखा है।

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Zero Waste Colony is the only option in delhi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की सारी कॉलोनियों को जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाकर प्रदूषण के जहर से बचा जा सकता है। 350 कॉलोनियां मौजूदा समय जीरो वेस्ट कॉलोनी बन गई हैं। निगम ने साल भर में सबको जीरो वेस्ट कॉलोनी बनाने का लक्ष्य रखा है। ये लक्ष्य पूरा हुआ तो दिल्ली की मिट्टी, हवा, जल धीरे-धीरे साफ हो जाएंगे और पर्यावरण के लिहाज से आने वाला कल बेहतर बन जाएगा। लेकिन यदि ऐसा अभी नहीं हुआ तो अगले तीन-चार साल में दिल्ली में 60-70 लाख टन कचरे का एक और कूड़े का पहाड़ नजर आएगा।

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राजधानी में हरदिन 11000 टन कचरा पैदा होता है और अभी इसमें से 7-8 हजार टन कचरा संसाधित हो पाता है। बाकी बचा हुआ 3-4 हजार टन कचरा सीधा दिल्ली की तीन लैंडफिल साइटों पर डंप किया जा रहा है। कूड़े के पहाड़ों पर कचरे को संसाधित जरूर किया जा रहा, लेकिन इसी तीव्रता से यहां नया कचरा एकत्रित भी हो रहा। इस प्रकार दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को जड़ से खत्म करना किसी सपने जैसा है। लेकिन सारी कॉलोनियों को जीरो वेस्ट बनाकर इस सपने को साकार किया जा सकता है।

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अब तक 350 कॉलोनियां बनीं जीरो वेस्ट

करीब नौ महीने के भीतर करीब 350 कॉलोनियां जीरो वेस्ट बन चुकी हैं। ये 100% कचरे को संसाधित कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस पर 127 आरडब्ल्यूए, एनजीओ या निजी समूहों को मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने जीरो वेस्ट कॉलोनी का प्रमाण पत्र दिया। इन्हें संपत्तिकर में 5% की अतिरिक्त छूट मिलेगी।


 
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जीरो वेस्ट कॉलोनी ही विकल्प - मेयर

मेयर डॉ शैली ओबरॉय ने कहा कि 12 जोन में हरेक वार्ड में जीरो वेस्ट कॉलोनी के लिए आरडब्ल्यूए के साथ पार्षद मीटिंग करेंगे। हमें नए कूड़े के समाधान के लिए ऐसा करना पड़ेगा। बिना आरडब्ल्यूए और स्वयं सहायता समूहों के ये काम सफल नहीं होगा।



 

जीरो से की शुरुआत तब बनी जीरो वेस्ट कॉलोनी
केस- 1

15 अप्रैल 2023 से हमने शुरुआत की। 30 मई तक पूरी कॉलोनी जीरो वेस्ट कॉलोनी बन गई। इसके लिए चिंतन संगठन के लोगों से मिलकर सबसे पहली मीटिंग हुई थी। फिर आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों के साथ लोगों के घर जाकर इसके लिए जागरूक किया। सोसायटी के एप पर लोगों को इकट्ठा किया। आज सूखा कूड़ा इपका एजेंसी ले जाती है। सूखे कूड़े से सोसायटी में कंपोस्ट खाद बन रही है। ललित कुमार सीकरी (सम्राट कॉपरेटिव सोसायटी)


 

केस- 2
हमने तय किया कि गीला-सूखा कूड़ा हम अलग-अलग करेंगे। इसके बाद जोन में निगम के सहायक आयुक्त के साथ मीटिंग हुई। उनका सहयोग मिलने पर हमने 33 सोसायटियों को संगठित किया। आज ये सभी जीरो वेस्ट कॉलोनी हैं। सूखा कूड़ा एजेंसी को देते हैं। इसके लिए 35 रुपये प्रति फ्लैैट देना होता है। एजेंसी गीले कूड़े से सोसायटी में ही कंपोस्ट बनाती है। एजेंसी ने 40 सोसायटियों के बीच एक डी कंपोस्टिंग के लिए एयरोबिन्स लगाए हैं। जेपी शर्मा (अध्यक्ष ज्वाइंट फोरम वसुंधरा एनक्लेव सीजीएचएस एंड इंस्टीट्यूट)

 

केस- 3
हमने दिसम्बर 2022 में शुरुआत की। एमसीडी के जोनल अधिकारियों के साथ मीटिंग की। अपनी सोसायटी में मीटिंग कर डीसेंट्रलाइज्ड कंपोस्टिंग पर सहमति बनाई। सबके घर से 100% गीला, सूखा कूड़ा दो बिन में निकलने लगा। अब गीले कूड़े से सोसायटी में खाद बनती है। सूखा कूड़ा निगम से जुड़ी एजेंसी उठा कर ले जाती है। खाद सोसायटी और बाहर के लोग भी इस्तेमाल कर रहे। हम आज जीरो वेस्ट कॉलोनी हैं।  डॉ नरेश चंद्र शर्मा(महेश अपार्टमेंट, वसुंधरा एनक्लेव)
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