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Delhi : गंभीर हालत में इमरजेंसी उपचार के लिए आने वालों में युवा अधिक, लोकनायक अस्पताल की रिपोर्ट में खुलासा
Mon, 19 May 2025 06:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
ललित कौशिक, नई दिल्ली
ललित कौशिक, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 19 May 2025 06:47 AM IST
सार
कोई सड़क हादसे में घायल होकर तो किसी को लड़ाई-झगड़े के दौरान चोटिल होने समेत अन्य कारणों से अस्पताल में उपचार के लिए लाया जाता है। यह जानकारी लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी की वर्ष 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है।
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लोकनायक अस्पताल
- फोटो : ANI
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विस्तार
लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार के लिए गंभीर हालत में पहुंचने वालों में युवा सबसे अधिक हैं। कोई सड़क हादसे में घायल होकर तो किसी को लड़ाई-झगड़े के दौरान चोटिल होने समेत अन्य कारणों से अस्पताल में उपचार के लिए लाया जाता है। यह जानकारी लोकनायक अस्पताल की इमरजेंसी की वर्ष 2024 की वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई है।
पांच हजार से ज्यादा पुरुष पहुंचे अस्पताल
रिपोर्ट के अनुसार 21-30 वर्ष की उम्र वालों में 5,049 पुरुषों और 810 महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। जबकि 31-40 वर्ष की उम्र वालों में 3377 पुरुष और 575 महिलाओं को, 41-50 वर्ष की उम्र वालों में 1793 पुरुष और 332 महिलाओं को, 51-60 वर्ष की उम्र वालों में 860 पुरुषों और 202 महिलाओं को और उससे अधिक उम्र वालों में 419 पुरुषों और 143 महिलाओं को उपचार के लिए भर्ती कराया गया। इन मामलों में मेडिको लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) भी तैयार किया गया। अगर बच्चों में बात की जाए तो 0-12 वर्ष वालों में 1039 बच्चे और 723 बच्चियां और 13-20 वर्ष की उम्र वालों में 1650 मेल और 403 फीमेल शामिल हैं।
लोकनायक अस्पताल की उप चिकित्सा अधीक्षक रितु सक्सेना ने बताया, एमएलसी वाले मामलों में 21-30 वर्ष की उम्र वाले युवा सबसे अधिक है। इसमें सड़क हादसे में चोटिल, लड़ाई-झगड़े के दौरान हुए घायल, किसी दुर्घटना में गंभीर चोट आना और यौन प्रताड़ना सहित कई दूसरे मामलों के लोग उपचार के लिए अस्पताल में आते हैं।
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एनएमएलसी के आंकड़ों में बच्चे सर्वाधिक
वहीं अगर नॉन मेडिको लीगल सर्टिफिकेट (एनएमएलसी) वाले आंकड़ों पर नजर डाले तो उसमें सबसे अधिक बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। इसमें 0-12 वर्ष की उम्र वालों में 28874 बच्चे और 20677 बच्चियां, 13-20 वर्ष की उम्र वालों में 10385 मेल और 8455 फीमेल शामिल हैं।
महिलाएं भी इमरजेंसी में अधिक पहुंचीं
इसके अलावा 21-30 वर्ष की उम्र वालों में 17643 पुरुष और 26021 महिलाएं, 31-40 वर्ष की उम्र वालों में 15587 पुरुष और 15601 महिलाएं, 41-50 वर्ष की उम्र वालों में 13326 पुरुष और 10254 महिलाएं, 51-60 वर्ष की उम्र वालों में 11252 पुरुष और 8502 महिलाएं और उससे अधिक उम्र वालों में 10871 पुरुष और 8507 महिलाएं शामिल है।
पौने आठ लाख नए मरीज ओपीडी में पहुंचे
रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल की अलग-अलग विभागों की ओपीडी में 7,77655 नए मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इसमें 2,66,602 पुरुष, 3,96,786 महिलाएं और 1,14,267 बच्चे शामिल हैं। जबकि 8,48,034 फॉलोअप मरीज अस्पताल में उपचार के लिए आए। इसके अलावा अलग-अलग बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल में 30,993 पुरुष, 37,968 महिलाएं और 26,776 बच्चे उपचार के लिए भर्ती हुए। सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन विभाग में भर्ती हुए।
एनएमएलसी की श्रेणी में कई तरह के मरीज आते है। इसमें किसी को तेज बुखार, पेट में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, महिला संबंधी बीमारी, उल्टी-दस्त की शिकायत, कान-दांत में तेज दर्द की शिकायत, गिरकर हाथ-पैर का टूट जाना सहित कई दूसरे बीमारी के मरीजों को इस श्रेणी में शामिल किया जाता है।
-डॉ. रितु सक्सेना
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पांच हजार से ज्यादा पुरुष पहुंचे अस्पताल
रिपोर्ट के अनुसार 21-30 वर्ष की उम्र वालों में 5,049 पुरुषों और 810 महिलाओं को उपचार के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। जबकि 31-40 वर्ष की उम्र वालों में 3377 पुरुष और 575 महिलाओं को, 41-50 वर्ष की उम्र वालों में 1793 पुरुष और 332 महिलाओं को, 51-60 वर्ष की उम्र वालों में 860 पुरुषों और 202 महिलाओं को और उससे अधिक उम्र वालों में 419 पुरुषों और 143 महिलाओं को उपचार के लिए भर्ती कराया गया। इन मामलों में मेडिको लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) भी तैयार किया गया। अगर बच्चों में बात की जाए तो 0-12 वर्ष वालों में 1039 बच्चे और 723 बच्चियां और 13-20 वर्ष की उम्र वालों में 1650 मेल और 403 फीमेल शामिल हैं।
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लोकनायक अस्पताल की उप चिकित्सा अधीक्षक रितु सक्सेना ने बताया, एमएलसी वाले मामलों में 21-30 वर्ष की उम्र वाले युवा सबसे अधिक है। इसमें सड़क हादसे में चोटिल, लड़ाई-झगड़े के दौरान हुए घायल, किसी दुर्घटना में गंभीर चोट आना और यौन प्रताड़ना सहित कई दूसरे मामलों के लोग उपचार के लिए अस्पताल में आते हैं।
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एनएमएलसी के आंकड़ों में बच्चे सर्वाधिक
वहीं अगर नॉन मेडिको लीगल सर्टिफिकेट (एनएमएलसी) वाले आंकड़ों पर नजर डाले तो उसमें सबसे अधिक बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। इसमें 0-12 वर्ष की उम्र वालों में 28874 बच्चे और 20677 बच्चियां, 13-20 वर्ष की उम्र वालों में 10385 मेल और 8455 फीमेल शामिल हैं।
महिलाएं भी इमरजेंसी में अधिक पहुंचीं
इसके अलावा 21-30 वर्ष की उम्र वालों में 17643 पुरुष और 26021 महिलाएं, 31-40 वर्ष की उम्र वालों में 15587 पुरुष और 15601 महिलाएं, 41-50 वर्ष की उम्र वालों में 13326 पुरुष और 10254 महिलाएं, 51-60 वर्ष की उम्र वालों में 11252 पुरुष और 8502 महिलाएं और उससे अधिक उम्र वालों में 10871 पुरुष और 8507 महिलाएं शामिल है।
पौने आठ लाख नए मरीज ओपीडी में पहुंचे
रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल की अलग-अलग विभागों की ओपीडी में 7,77655 नए मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इसमें 2,66,602 पुरुष, 3,96,786 महिलाएं और 1,14,267 बच्चे शामिल हैं। जबकि 8,48,034 फॉलोअप मरीज अस्पताल में उपचार के लिए आए। इसके अलावा अलग-अलग बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल में 30,993 पुरुष, 37,968 महिलाएं और 26,776 बच्चे उपचार के लिए भर्ती हुए। सबसे ज्यादा मरीज मेडिसिन विभाग में भर्ती हुए।
एनएमएलसी की श्रेणी में कई तरह के मरीज आते है। इसमें किसी को तेज बुखार, पेट में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, महिला संबंधी बीमारी, उल्टी-दस्त की शिकायत, कान-दांत में तेज दर्द की शिकायत, गिरकर हाथ-पैर का टूट जाना सहित कई दूसरे बीमारी के मरीजों को इस श्रेणी में शामिल किया जाता है।
-डॉ. रितु सक्सेना