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4 मार्च को होगा योगेंद्र और भूषण पर फैसला

Mon, 02 Mar 2015 09:21 PM IST
Updated Mon, 02 Mar 2015 09:21 PM IST
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Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

आप में शांति भूषण और योगेंद्र यादव की छुट्टी की खबरों को लेकर आम आदमी पार्टी ने आज दिन में एक प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें पार्टी ने विवादों को लेकर सफाई दी।

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कहा जा रहा है कि अब योगेंद्र और प्रशांत पर फैसला चार मार्च को होगा। इसी बीच पार्टी के बड़े नेता आशुतोष ने एक ट्वीट कर पार्टी में चल रही अंदरूनी उठापटक को और तेज कर दिया है।
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आशुतोष ने अपनी ट्वीट में लिखा है कि पार्टी में जो विचारों का मतभेद चल रहा है वह वामपंथी विचारधारा जो कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करते हैं उनके और विकास व लोगों की भलाई के लिए काम करने वालों के बीच का मतभेद है।
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आशुतोष आगे लिखते हैं कि ये लोगों का नहीं बल्कि विचारों के बीच का द्वंद्व है। इसी द्वंद्व से आप की भविष्य की राजनीति की दिशा तय होगी।

तय हो गई है PAC से इन नेताओं की छुट्टी

Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

आम आदमी पार्टी (आप) की सबसे सक्रिय संस्था राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) से वरिष्ठ नेता योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण की छुट्टी तकरीबन तय है। अगले दो दिन में नई पीएसी का ऐलान भी हो जाएगा। राष्ट्रीय कार्यकारिणी (एनई) ने इसका जिम्मा संयोजक अरविंद केजरीवाल पर डाला है। खास बात यह कि एनई की बैठक में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के खिलाफ कई सवाल उठाए गए।

दिल्ली चुनाव के बाद पहली बार बीते बृहस्पतिवार को बैठी ‘आप’ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में काफी हंगामा हुआ। सूत्र बताते हैं कि इसमें सबसे ज्यादा चर्चा केजरीवाल के इस्तीफे पर हुई। इस दौरान प्रशांत भूषण ने संयोजक पद से केजरीवाल को हटाने का प्रस्ताव भी रखा।

भूषण की दलील मुख्यमंत्री पद व ‘आप’ संयोजक की दोहरी जिम्मेदारियों पर थी। लेकिन एकमत से इसे खारिज कर दिया गया। आखिरकार उसी शाम कार्यकारिणी के मतदान का अधिकार रखने वाले 21 सदस्यों ने केजरीवाल से उनके घर पर मुलाकात की। अगले दिन फैसला लिया गया कि केजरीवाल पीएसी का पुनर्गठन करें।

इन खबरों की वजह से योगेन्द्र पर हुई कार्रवाई

Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

सूत्र बताते हैं कि बैठक में कुछ खबरों और ऑडियो रिकॉर्डिंग से यह साबित करने की कोशिश हुई कि हरियाणा में चुनाव न लड़ने के फैसले से नाराज योगेंद्र ने केजरीवाल के खिलाफ जाने वाली खबरें प्रकाशित करवाई थीं। एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली फ्लॉप होने के बाद ही योगेंद्र दिल्ली चुनाव में सक्रिय हुए। इस पर योगेंद्र ने बहस भी की।

सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के दूसरे दिन की बैठक में यादव शामिल नहीं हुए। एक नेता ने सवाल उठाया कि लोक सभा चुनाव के बाद जब दिल्ली में पार्टी दोबारा खड़ी हो रही थी, तो वरिष्ठ नेता शांति भूषण आवाम के हक में बात कर रहे थे। सवाल इस पर भी उठा कि दिल्ली चुनाव में लोकपाल की जांच के बाद दो उम्मीदवारों को हटा दिया गया।

लोकपाल की चिट्ठी बनी वजह

Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

इसके शांति भूषण ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी। जबकि शिकायत भी उन्हीं ने की थी। फिर, दिल्ली चुनाव से जुड़े कई नेताओं ने आरोप लगाया कि शांति भूषण उम्मीदवारों के चयन पर लगातार दबाव डाल रहे थे।


बृहस्पतिवार को ही ‘आप’ के आंतरिक लोकपाल की चिट्ठी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पेश हुई थी। लेकिन इस बारे में चर्चा नहीं हुई। 12 घंटे की बैठक में सिर्फ आधा घंटा मिशन विस्तार के नाम रहा।

बाकी समय विवादित मसलों पर ही चर्चा हुई। इस बारे में पार्टी का कोई नेता बात करने को तैयार नहीं हुआ। संजय सिंह ने सिर्फ इतना बताया कि कोई भी फैसला होने पर इसकी जानकारी मीडिया को दी जाएगी। वहीं, योगेंद्र यादव ने पार्टी के अंदरूनी मामलों पर मीडिया से बात करने से इनकार दिया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि दोनों नेताओं को नई पीएसी में जगह मिलना मुश्किल है।

दोनों के खिलाफ ये हैं मुख्य सवाल

Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

हरियाणा चुनाव में न जाने के फैसले पर केजरीवाल के खिलाफ जाने वाली खबरें प्रकाशित करवाईं। इसका स्टिंग भी पेश किया गया।

मनीष सिसोदिया और योगेंद्र के बीच इंटरनल ई-मेल को लीक किया।
संसदीय चुनाव में इतने बड़े पैमाने पर जाने के अहम रणनीतिकार भी यही रहे।

प्रशांत भूषण के खिलाफ उठाए गए सवाल:
दिल्ली विस चुनाव में 12 उम्मीदवारों की शिकायत भी की और इसे मीडिया में लीक भी कर दिया।
पीएसी के संयोजक पद से केजरीवाल को हटाने व पार्टी के आंतरिक लोकपाल पूर्व एडमिरल रामदास से पत्र लिखवाने का आरोप।
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ अन्ना हजारे के मंच पर केजरीवाल के पहुंचते ही भूषण ने मंच छोड़ दिया।

शांति भूषण को लेकर नाराजगी की वजह:

Yogendra Yadav and Prashant Bhushan set off from the PAC

- दिल्ली विस चुनाव के आखिरी वक्त केजरीवाल के खिलाफ बयानबाजी की।
- मुख्यमंत्री के तौर पर केजरीवाल को तीसरी पसंद बताते हुए राजनीतिक तौर पर अपरिपक्व भी कहा।
- पार्टी फोरम की जगह सार्वजनिक तौर पर ‘आप’ में आंतरिक लोकतंत्र न होने का उठाया सवाल।

पूर्व एडमिरल रामदास के ये हैं तीखे सवाल
- पार्टी में महिलाओं की उपेक्षा हुई है। सरकार व पीएसी में कोई महिला सदस्य नहीं है। पार्टी ब्वॉयज क्लब नजर आती है।
- पिछले आठ माह में पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद और आपसी भरोसे की कमी है। पार्टी में दो धड़े पनप रहे हैं। साजिशों के बारे में हल्की बातें हो रही हैं।
‘आप’दूसरे दलों से अलग नहीं।
- दिल्ली चुनाव से पहले पार्टी में संकट था। प्रशांत भूषण ने प्रत्याशियों के चुनाव के तरीकों पर एतराज जताया था।
- दिल्ली का मुख्यमंत्री और पार्टी संयोजक एक ही व्यक्ति कैसे हो सकता है।
- पीएसी और अन्य एनई जैसी कमेटियों का भी पुनर्गठन होना चाहिए।

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