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'पीएम के घर के सामने है जुआरियों का अड्डा'

Mon, 27 Jul 2015 12:14 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Jul 2015 12:14 PM IST
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Yogendra-Prashan took to the road, warned to the central government.

स्वराज अभियान और जय किसान आंदोलन के बैनर तले किसानों ने रविवार को प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित दिल्ली रेस कोर्स क्लब के सामने प्रदर्शन किया। इसकी अगुवाई योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आनंद कुमार व अजित झा ने की।

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इस मौके पर रेस कोर्स क्लब के सदस्यों व प्रदर्शनकारियों में तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि भारी पुलिस बल की मौजूदगी से कोई टकराव नहीं हुआ।

प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि दिल्ली रेस कोर्स क्लब किसानों की जमीन पर बना है।

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केंद्र सरकार को दी चेतावनी

Yogendra-Prashan took to the road, warned to the central government.

लेकिन ब्रिटिश काल में अधिग्रहीत जमीन का अभी तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला है। इस मौके पर प्रशांत भूषण ने सरकार के नाम एक पब्लिक नोटिस भी जारी किया।

साथ ही चेतावनी दी कि अगर 15 दिन के भीतर इसका जवाब नहीं मिला तो 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के मौके पर किसान सड़क पर आकर इसका जवाब मांगेंगे।

साथ ही उन्होंने मांग की कि दिल्ली रेस कोर्स क्लब को इस जमीन से बेदखल कर किसान स्मारक बनाया जाए।

'क्लब की जमीन पर बने किसान हाट'

Yogendra-Prashan took to the road, warned to the central government.

इससे पहले वीवीआईपी सुरक्षा वाले इस इलाके में जय किसान आंदोलन ने बेहद गोपनीय ढंग से किसानों को तीन मूर्ति भवन के सामने बुलाया गया था।

लेकिन करीब एक बजे अचानक कार्यक्रम में बदलाव करके किसानों को रेस कोर्स क्लब पहुंचने का संदेश दिया गया। करीब डेढ़ बजे सैकड़ों प्रदर्शनकारी रेस कोर्स क्लब पहुंचे।

इनके हाथ में तख्ती, पोस्टर, बैनर और तिरंगा झंडा था। प्रदर्शनकारी भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्लब की जमीन पर किसान हाट खोलने की मांग कर रहे थे।

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'जारी रहेगी लड़ाई'

Yogendra-Prashan took to the road, warned to the central government.

योगेंद्र यादव ने कहा कि मालचा गांव की खेती की जमीन को जबरन किसानों से छीनकर प्राइवेट कंपनी का सौंप दिया गया था। इसी जमीन पर रेस कोर्स क्लब चलता है।

खास बात यह कि अधिग्रहण सार्वजनिक काम के नाम पर हुआ था। लेकिन यहां फिलहाल दौलतमंद जुआरियों का अड्डा है। प्रधानमंत्री के घर के सामने यह सब कुछ हो रहा है।

जबकि आनंद कुमार ने कहा कि रेस कोर्स क्लब किसानों के शोषण का प्रतीक है। ब्रिटिश सरकार ने जबरन किसानों की जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन आज तक किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल सका है। स्वराज अभियान इसकी लड़ाई आगे भी लड़ता रहेगा।

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