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FB पर योगेंद्र ने लिखा लंबा खत, बताया दर्द

Wed, 22 Apr 2015 12:31 PM IST
Updated Wed, 22 Apr 2015 12:31 PM IST
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Yogendra Has written a long letter on social sites telling  pain

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पार्टी ने निकाले जाने की सूचना मिलने के बाद योगेंद्र यादव ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर लंबी चिट्ठी लिखी है। योगेंद्र ने लिखा है कि आधी रात में पांच मिनट बाकी थे, तभी फोन की घंटी बजी। अनिष्ट की आशंका हुई। फोन एक टीवी चैनल से था।

दूसरी तरफ से बताया गया कि आपको पार्टी से निकाल दिया गया है। आपका फोनो लेना है। आपकी पहली प्रतिक्रिया? आरोपों के जवाब में आपको क्या कहना है? आगे क्या करेंगे? पार्टी कब बनाएंगे? वो सवालों की रस्म निभा रहे थे, मैं उत्तरों की।

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यादव लिखते हैं कि बाद में हमने अपने आपसे पूछा, तो आपकी पहली प्रतिक्रिया? अंदर से साफ जवाब नहीं आया। शायद इसलिए कि खबर अप्रत्याशित नहीं थी। पिछले कई दिनों से इशारे साफ थे।
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रंग-ढंग से जाहिर था किस फैसले की तैयारी थी

Yogendra Has written a long letter on social sites telling  pain

जब से 28 मार्च की मीटिंग का वाकया हुआ तबसे किसी भी बात से धक्का नहीं लगता। अनुशासन समिति के रंग-ढंग से जाहिर था किस फैसले की तैयारी हो चुकी थी।


आगे लिखा कि अगर आपको घसीट कर आपके घर से निकाल दिया जाए (और तिस पर कैमरे लेकर आपसे आपकी प्रतिक्रिया जानने की होड़ हो) तो आपको कैसा लगेगा? बस वैसा की कुछ लगा। सबसे पहले तो गुस्सा आता है। ये कौन होते हैं हमें निकालने वाले? कभी मुद्दई भी खुद जज सकते हैं?

यादव सवाल खड़ा करते हैं कि फिर अचानक से दबे पांव दुख पकड़ लेता है। वो सब याद आता है जो पीछे छूट गया। इतने खूबसूरत कार्यकर्ता, कई साथी जो शायद अब मिलने से भी डरेंगे।

केएल सहगल गूंज रहे हैं : बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए

Yogendra Has written a long letter on social sites telling  pain

केएल सहगल गूंज रहे हैं : बाबुल मोरा नैहर छूटो ही जाए। आगे लिखते हैं कि फिर ममता की बारी है। दिल से दुआ निकलती है। अब जिसका भी कब्जा है वो घर को ठीक से बनाकर रखे।


जिस उम्मीद को लेकर इतने लोगों ने यह घोंसला बनाया था, उम्मीद कहीं टूट न जाए। अंत में यादव लिखते हैं कि कहीं संकल्प अपना सिर उठाता है। समझाता है, जो हुआ अच्छे के लिए ही हुआ।

घर कोई ईंट-पत्थर से नहीं बनता, घर तो रिश्तों से बनता है। हो सकता है एक दिन हम उन्हें दुआ देंगे जिन्होंने हमें सड़क पर लाकर नया रास्ता दिखा दिया। हरिवंश राय बच्चन की पंक्तियां गूंज रही थीं, नीड़ का निर्माण फिर.....। ये किसी कहानी का दुखांत नहीं है, एक नई, सुंदर और लंबी यात्रा की शुरुआत है।

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