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यमुना में फिर दिख रहा खतरनाक सफेद झाग

Fri, 03 Feb 2017 01:07 AM IST
विवेक मिश्रा/अमर उजाला, नई दिल्ली
विवेक मिश्रा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Feb 2017 01:07 AM IST
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Yamuna is looking dangerous again white foam
yamuna main jhag - फोटो : अमर उजाला

ठहरी यमुना के किनारों पर सफेद झाग के बड़े गोले फिर से दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह स्थिति बताती है कि प्रवाह विहीन यमुना प्राणहीन हो चुकी है। तमाम सफाई योजनाओं पर पलीता लग चुका है। स्थिति गंभीर है। सफेद झाग मूलत: औद्योगिक अपशिष्ट हैं।

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यमुना के कई भागों में फिर से इसे देखा जा रहा है। ‘यमुना जिए अभियान’ के संयोजक मनोज मिश्रा ने बातचीत में कहा कि नदियों का अस्तित्व उसके पर्यावरणीय प्रवाह बने रहने से है, जबकि यमुना का प्रवाह थम गया है। सफेद झाग के गोलों का फिर से दिल्ली में मौजूद यमुना में दिखाई देना यह गवाही देता है कि यमुना में ऑक्सीजन की मात्रा समाप्त हो चुकी है।
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वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यमुना में बीते वर्ष नमूनों की जो जांच की और उसके नतीजे जो आए, वह भी यही कहते हैं कि नदी की धड़कन उखड़ने को है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में बीते वर्ष 8 सितंबर को मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना-2017 के मामले में यमुना के जल की गुणवत्ता पर रिपोर्ट दाखिल की गई थी।

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आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा

Yamuna is looking dangerous again white foam
yamuna main jhag - फोटो : अमर उजाला

इस रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली में पल्ला, निजामुद्दीन ब्रिज, ओखला, कालिंदी कुंज पर आगरा कैनाल और मदनपुर खादर में यमुना की स्थिति बेहद खराब है। इन स्थानों से वर्ष भर लिए गए जल नमूनों से यह बात सामने आई कि इन पांचों जगहों पर नदी में घुलनशील ऑक्सीजन, बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और क्लोरीफॉर्म की स्थिति बेहद खराब है।


एनजीटी ने बीते वर्ष प्राधिकरणों को यमुना से जुड़ने वाले सभी औद्योगिक क्षेत्रों के नालों को सीवेज शोधन यंत्र (एसटीपी) से जोड़ने का निर्देश दिया था। वहीं मौजूद एसटीपी की क्षमता को बढ़ाने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद फिर से यमुना में गंदगी दिखाई देना प्राधिकरणों की लापरवाही को दर्शाता है। वहीं एनजीटी ने हरियाणा सरकार को यह आदेश भी दिया था कि वह 10 क्यूमेक यानी 10 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड पानी हथिनी कुंड बैराज में छोड़े, ताकि वहां से वजीराबाद तक यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह कायम रहे। इस आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा।

Yamuna is looking dangerous again white foam
yamuna main jhag - फोटो : अमर उजाला

1993 में यमुना एक्शन प्लान शुरू किया गया था। इसके तहत दिल्ली सरकार को वित्तीय सहायता केंद्र के जरिये हासिल होनी थी। मौजूदा समय यमुना एक्शन प्लान-3 पर काम हो रहा है। यमुना एक्शन प्लान-एक और दो पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वहीं यमुना एक्शन प्लान 3 के तहत बीते वर्ष दिल्ली जल बोर्ड को 1665 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।


प्राधिकरण यमुना में प्रदूषण रोकने का इलाज एसटीपी बताते हैं, जबकि बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के गंगा विभाग के प्रोफेसर यूके चौधरी का कहना है कि एसटीपी नदियों का इलाज नहीं है, बल्कि उनमें प्रवाह को मजबूत बनाया जाना चाहिए। वहीं दुनिया से विदा हो चुके मशहूर पर्यावरणविद अनुपम मिश्र कहते थे कि यदि प्रत्येक वर्ष यमुना में प्रधानमंत्री एक बार भी डुबकी लगाते तो यमुना की यह गति न होती।

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