फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Wrestlers fought in support of farmers caravan of women and laborers reached Tikri border

किसानों के समर्थन में पहलवानों ने लड़ा दंगल, टीकरी बॉर्डर पहुंचा महिलाओं और मजदूरों का कारवां

Sun, 10 Jan 2021 08:38 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 10 Jan 2021 08:38 PM IST
विज्ञापन
Wrestlers fought in support of farmers caravan of women and laborers reached Tikri border
गाजीपुर बॉर्डर पर खेला गया दंगल और टीकरी बॉर्डर पर किसानों के समर्थन में पहुंची महिलाएं - फोटो : amar ujala

गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के सम्मान में रविवार को 'संयुक्त किसान मंच' ने किसान केसरी दंगल का आयोजन किया गया। दोपहर करीब 12 बजे जब कुश्ती के लिए मैट बिछाए जा रहे थे। तब से ही आसपास दंगल देखने वालों की भीड़ उमड़ने लगी। कुछ ही देर में करीब 20 पहलवान अखाड़े के पास पहुंच गए। इनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। 

विज्ञापन


आयोजकों ने सबसे पहले मुकाबले में आए पहलवानों का परिचय कराया। इसके बाद लाउडस्पीकर पर मुकाबले शुरू होने की घोषणा की गई। यह सुनते ही सभी लोग कुश्ती स्थल के आसपास पहुंचने लगे। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ उमड़ गई।आलम यह था कि लोग ट्रैक्टर, गाड़ी और फ्लाईओवर के डिवाइडर पर चढ़कर मुकाबला देख रहे थे। आंदोलनरत किसानों से लेकर आसपास के रहने वाले लोग और पुलिसकर्मी भी दर्शकों में शामिल थे। 
विज्ञापन


पहला मैच मुजफ्फरनगर के पहलवान योगेंद्र और राजभर के बीच खेला गया। पहलवानों को देखकर ही लोग उनकी जीत -हार का कयास लगा रहे थे। एक मुकाबले बड़े पहलवानों को 5 मिनट और छोटे पहलवानों को तीन मिनट का समय दिया जा रहा था। एक के बाद एक कई मुकाबले हुए। जो भी पहलवान जीत रहा था आसपास मौजूद लोग उसको इनाम दे रहे थे। दंगल में करीब 60 महिला पहलवान और पुरूष पहलवान शामिल हुए। 
विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय किसान यूनियन ( भाकियू ) राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के समर्थन में अब पहलवान भी आ गए हैं। आंदोलनरत किसानों आत्मविश्वास काफी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को हर वर्ग के लोगों का समर्थन मिल रहा है। यह खुशी की बात है। बॉर्डर पर दंगल के आयोजक सदस्य शहीद बचन सिंह कुश्ती अखाड़े के संस्थापक चौधरी युधिष्ठिर पहलवान ने कहा कि वह पहले किसान के बेटे हैं, उसके बाद पहलवान हैं। किसानों की लड़ाई में अब वह भी उतर गए हैं। 

दंगल प्रतियोगिता में शामिल हुई महिला पहलवान सोनाक्षी रोहन ने कहा कि वह 3 साल से कुश्ती लड़ रही है। कुछ दिन पहले संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से उन्हें गाजीपुर बॉर्डर पर आने का निमंत्रण मिला था। उन्होंने कहा कि हक की लड़ाई में वह भी किसानों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता भी एक किसान है। 

सरकार की ओर से लागू किए गए नए किसी कानून किसान विरोधी है। सरकार को जल्द से जल्द कानून वापस लेने चाहिए। सरकार और किसानों के बीच 8वें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही थी। किसान अपने मांगों पर अड़े हुए हैं। अगली बैठक 15 जनवरी को आयोजित की जाएगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि ये बैठक महत्वपूर्ण होगी और किसी न किसी नतीजे पर जरूर पहुंचेगी।
 

किसानों के समर्थन में टीकरी बॉर्डर पहुंचा महिलाओं और मजदूरों का कारवां 

टीकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन को रविवार को भी भारी जनसमर्थन मिला। पंजाब और हरियाणा से हजारों की संख्या में महिलाओं व मजदूरों का कारवां यहां पहुंचा और किसानों की आवाज के साथ अपनी आवाज बुलंद की।

टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था। साथ ही भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बैनर तले हजारों महिला समर्थकों ने भी मोर्चा संभाल रखा था। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि 3 हजार से अधिक महिलाएं किसानों के समर्थन में पहुंचीं। उन्होंने कहा कि किसान सरकार से हर मोर्चे पर बात करने के लिए राजी हुए। लेकिन सरकार से बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला। 

उन्होंने कहा कि अब सरकार से बातचीत का कोई फायदा दिखाई नहीं दे रहा है। सरकार की मंशा ठीक होती तो वह अब तक किसानों की बात मान चुकी होती। लेकिन सरकार यह बात जान ले कि किसान अब बिना तीनों कृषि कानूनों को वापस कराए बिना यहां से वापस नहीं जाएंगे। चाहे किसानों को साल 2024 तक दिल्ली की सीमाओं पर ही क्यों ना बैठना पड़े। यहां पर बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाएं भारतीय किसान यूनियन का झंडा थामें पहुंची थीं। 

जोगिंदर सिंह ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं, जब पूरा पंजाब खाली होकर दिल्ली की सीमाओं पर आ जाएगा। सरकार को यह बात अबतक समझ में नहीं आ रही है। रविवार को टीकरी बॉर्डर पर उन किसानों के तिरपाल बदले गए, बरसात में जिनके तिरपाल फट गए थे। भारतीय किसान यूनियन के नेता पुरुषोत्तम उदत ने बताया कि हरियाणा के लोगों के सहयोग से दर्जनों किसानों की ट्रालियों पर तिरपाल बदले गए। उन्होंने कहा कि किसान अब इस बात से वाकिफ हो गए हैं कि अभी उनका यह आंदोलन लंबा चलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed