फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Wrestler Sagar Dhankhar murder case Sushil Kumars bail plea rejected

सागर धनखड़ मर्डर केस: सुशील कुमार की जमानत याचिका खारिज, पांच साल पहले पीट-पीटकर ले ली थी पहलवान की जान

Fri, 06 Feb 2026 06:51 PM IST
विकास कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Fri, 06 Feb 2026 06:51 PM IST
सार

सुशील कुमार के लिए अब आगे की कानूनी लड़ाई और भी कठिन हो गई है। रोहिणी कोर्ट के इस फैसले के बाद, उनके पास अब उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प बचा है।

विज्ञापन
Wrestler Sagar Dhankhar murder case Sushil Kumars bail plea rejected
पहलवान सुशील कुमार - फोटो : X @ANI

विस्तार

पहलवान सागर धनखड़ की 2021 में हुई हत्या के मामले में पहलवान सुशील कुमार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सुशील कुमार की नियमित जमानत की याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला सुशील कुमार के लिए एक और निराशा है, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपियों में से एक हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ही उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद उन्हें पुनः गिरफ्तार किया गया था।

विज्ञापन

मामले की पृष्ठभूमि और अब तक की कानूनी कार्रवाई
सागर धनखड़ की हत्या का मामला 4 मई 2021 को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुआ था। आरोप है कि सुशील कुमार और उनके साथियों ने कथित तौर पर रंजिश के चलते सागर धनखड़ और उसके दोस्तों पर हमला किया था। इस हमले में सागर धनखड़ को गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद सुशील कुमार फरार हो गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। तब से यह मामला विभिन्न अदालतों में चल रहा है। सुशील कुमार की ओर से लगातार जमानत की अर्जी लगाई जाती रही है, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

जमानत याचिका खारिज होने के मुख्य कारण
रोहिणी कोर्ट ने सुशील कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए कई अहम बिंदुओं पर गौर किया। अदालत ने माना कि सुशील कुमार इस गंभीर अपराध के मुख्य आरोपी हैं और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। जमानत मिलने की स्थिति में उनके फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की प्रबल आशंका है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले उनकी जमानत रद्द किया जाना भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा, जिसने निचली अदालतों के लिए भविष्य के निर्णयों के लिए एक मिसाल कायम की। अदालत ने यह भी माना कि यह एक जघन्य अपराध है और समाज में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed