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World Stroke Day: हर साल 17 लाख रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक, पहले मरीज का सफल इलाज; इस चीज से जल्द मिलेगी राहत

Tue, 29 Oct 2024 07:49 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 29 Oct 2024 07:49 AM IST
सार

एम्स के न्यूरो इमेजिंग एवं इंटरवेंशनल तंत्रिका विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि नया स्टंट रिट्रीवर अगली पीढ़ी का उपकरण है। इसे विशेष रूप से भारतीय आबादी में स्ट्रोक के थक्कों के विशिष्ट लक्षणों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।

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World Stroke Day Brain stents can cost one-fourth of current price.
ब्रेन स्ट्रोक - फोटो : Freepik.com

विस्तार

ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को आने वाले दिनों में बड़ी राहत मिल सकती है। उम्मीद है कि देश में विकसित होने वाले ब्रेन स्टंट के दाम मौजूदा कीमत से एक चौथाई हो सकते हैं। इसे विकसित करने के लिए एम्स सहित 16 केंद्रों पर ट्रायल चल रहा है। इस ब्रेन स्टंट के तहत एम्स में पहले ब्रेन स्ट्रोक के मरीज का सफल इलाज हुआ, जबकि दूसरे मरीज का इलाज चल रहा है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अभी ब्रेन स्टंट विदेश से मंगाया जाता है। इसका दाम 1.75 लाख के करीब होता है। इसी के विकल्प की तलाश के लिए ग्रास रूट ट्रायल चल रहा है। ट्रायल के तहत एम्स में विकल्प की मदद से 25 अगस्त को 58 साल के एक मरीज का इलाज किया गया, जबकि 67 साल के अन्य मरीज का इलाज चल रहा है। इस ब्रेन स्टंट का इस्तेमाल कर दिमाग की बड़ी नस में होने वाले ब्लॉकेज को खोला गया।
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एम्स के न्यूरो इमेजिंग एवं इंटरवेंशनल तंत्रिका विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. शैलेश गायकवाड़ ने बताया कि नया स्टंट रिट्रीवर अगली पीढ़ी का उपकरण है। इसे विशेष रूप से भारतीय आबादी में स्ट्रोक के थक्कों के विशिष्ट लक्षणों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। स्टंट को अंतरराष्ट्रीय और भारतीय डॉक्टरों व इंजीनियरों के विशेषज्ञ इनपुट से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को तेज, सुरक्षित एवं पूर्ण रूप से बहाल करना है। इसे हर जगह रोगियों का इलाज करने के लिए बनाया गया। यह सभी प्रकार के रक्त के थक्कों को हटाने में सक्षम है। 
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मौजूदा उपकरणों की तुलना में अवरुद्ध धमनियों को खोलने में इसका परिणाम ट्रायल में बेहतर मिला। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह स्टंट जब देश में बनने लगेगा तो इसकी लागत एक चौथाई रह जाएगी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। दक्षिण पूर्व एशिया में डिवाइस को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और पिछले 6 महीनों में 120 से अधिक रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है। 

युवाओं में भी बढ़ रही समस्या
देश के युवाओं में कई कारणों से ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि यह आंकड़ा कम है और इस पर शोध चल रहा हैै। डॉक्टरों का कहना है कि 50 साल के बाद ज्यादातर लोगों में ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका रहती है। 60 से 70 फीसदी लोगों में ब्रेन स्ट्रोक के पीछे ब्लॉकेज बढ़ा कारण होता है। वहीं अन्य मामले में हेमरेज व दूसरे कारण होते हैं। अध्ययन के दौरान 18 से 85 साल तक के लोगों को देखा जाता है, लेकिन अब 16 साल के युवा में भी ब्रेन स्ट्रोक मिल रहा है।


हर साल 17 लाख रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक
देश में हर साल करीब 17 लाख रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक होता है। इनमें से 3.75 लाख रोगियों को इंटरवेंशनल स्ट्रोक उपचार से लाभ मिल सकता है, लेकिन 2023 में केवल 4500-5000 रोगियों को ही जीवन रक्षक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी मिली।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण 
अचानक सुस्ती, पैर में सुन्नता, बोलने में कठिनाई, दृष्टि संबंधी समस्याएं, संतुलन की कमी, अचानक सिरदर्द और शरीर के एक तरफ चेहरे में असामान्यताएं।

इनमें ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका ज्यादा
मेनोपॉज के बाद महिलाएं
हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप, और एरिदमिया रोगी 
मधुमेह, धूम्रपान करने वाले 
मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली 
परिवार में किसी को स्ट्रोक हुआ हो
अस्वास्थ्यकर आहार

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