इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विश्व का सबसे बड़ा चरखा, वजन 4 टन
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विश्व के सबसे बड़े चरखे का अनावरण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने किया। बर्मा की सागौन की लकड़ी से बने इस चार टन वाले चरखे का 50 साल से अधिक समय तक चलने का अनुमान है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने इसे तैयार करवाया है। यह 9 फुट चौड़ा, 17 फुट ऊंचा और 30 फुट लंबा है। इसे अहमदाबाद के 42 कारपेंटरों के समूह ने 55 दिनों की मेहनत से तैयार किया है।
इस मौके पर अमित शाह ने भारतीय स्वाधीनता के संघर्ष में चरखे की भूमिका का स्मरण करते हुए इसे आत्म निर्भरता का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि अगर हर संपन्न लोग साल में पांच हजार रुपया खादी के उपयोग पर खर्च करें तो इससे बेरोजगारी दूर होने में मदद मिलेगी। रेलवे 40 प्रतिशत खादी का उपयोग करता है। इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला है।
चरखा हमारी गौरवशाली धरोहर का प्रतीक
उन्होंने यह भी कहा कि विश्व के सबसे विशालतम चरखे के प्रदर्शन का उद्देश्य एक समतावादी समाज को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों को सामने लाना है। जैसा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उल्लेख किया था।
एयरपोर्ट के गेट संख्या 4 व 5 के बीच स्थापित चरखे की स्थापना टर्मिनल पर अपनी विविध कलाकृतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर की विरासत को प्रोत्साहित करेगी। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष वीके सक्सेना का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भेजे संदेश में खादी और ग्रामोद्योग आयोग को बधाई देते हुए लिखा है कि चरखा हमारी गौरवशाली धरोहर का प्रतीक है।
हमारी स्वतंत्रता के संघर्ष का प्रेरणादायक अनुस्मरण भी है जिसकी अगुवाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी। मुझे विश्वास है कि इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यह चरखा यात्रियों को भारत की शास्वत विरासत, दीर्घ कालिकता और सौहार्द के मूल्यों की याद दिलाएगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, गिरीराज सिंह, डॉ. महेश शर्मा, संसद सदस्य मीनाक्षी लेखी समेत कई लोग उपस्थित थे।