फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   World Kidney Day: AIIMS researched patient life was not easy even after kidney transplantation

विश्व किडनी दिवस: गुर्दा प्रत्यारोपण के बाद भी आसान नहीं होता मरीज का जीवन, एम्स ने किया शोध

Thu, 14 Mar 2019 02:22 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 14 Mar 2019 02:22 AM IST
विज्ञापन
World Kidney Day: AIIMS researched patient life was not easy even after kidney transplantation

एक ओर देश में गुर्दा रोगियों की संख्या कई गुना तेज रफ्तार से बढ़ रही है। वहीं, गुर्दा फेल होने के बाद प्रत्यारोपण कराने पर भी मरीज को आराम नसीब नहीं हो पा रहा। इसके पीछे वजह है प्रत्यारोपण के साथ ही रोगी के शरीर में कई घातक वायरस का हमला करना।

विज्ञापन


इस संक्रमण के चलते मरीजों की जान तक जा रही है। यही वजह है कि देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स ने इन चुनौतियों को समझते हुए मरीज के उपचार में प्रत्यारोपण के बाद की मुश्किलों को पहले से ही शामिल करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


डॉक्टरों का कहना है कि लोग पहले से ही जागरूक बनें। गुर्दे से जुड़ी बीमारियों की निगरानी रखें ताकि नौबत क्रोनिक किडनी डिजीज तक ना पहुंचे। बुधवार को विश्व गुर्दा दिवस की पूर्व संध्या पर एम्स में आयोजित कार्यक्रम में भी अहम जानकारियां साझा की गईं।

विज्ञापन
विज्ञापन

एम्स के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल का कहना है कि प्रत्यारोपण के बाद रोगी को सीएनवी और बीके वायरस जकड़ लेता है। इस कारण प्रत्यारोपण के बाद भी मरीज का जीवन संक्रमण से घिरा रहता है। इसलिए प्रत्यारोपण के बाद भी इन रोगियों को पूर्ण रूप से आराम मिलने का दावा करना ठीक नहीं।

एम्स ने शोध के बाद नेफ्रोपैथी पर फोकस किया है। हैपेटाइटिस सी, बी और प्रत्यारोपण के बाद होने वाले संक्रमण को पहले से ही डॉक्टर ध्यान में रख उपचार कर रहे हैं। एम्स में इस समय कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें दो से तीन बार प्रत्यारोपण कराना पड़ा है।

वहीं, एक मरीज ऐसा भी है, जिसने 40 साल पहले एम्स में ही प्रत्यारोपण कराया था। डॉक्टरों का मानना है कि प्रत्यारोपण के बाद की स्थितियों को लेकर एम्स ने कई शोध किए। इनके परिणाम आने के बाद एम्स ने इलाज प्रक्रिया को और मजबूत बनाया। 

निजी अस्पतालों में सबसे ज्यादा प्रत्यारोपण
डॉ. एसके अग्रवाल ने बताया कि देश में गुर्दा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ बेहद कम हैं, लेकिन सालाना छह हजार से ज्यादा प्रत्यारोपण किए जा रहे हैं। 80 फीसदी प्रत्यारोपण निजी अस्पतालों में किए जा रहे हैं। इनमें से करीब 50 फीसदी से ज्यादा मामले प्रत्यारोपण के बाद संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। अंदेशा है कि संक्रमण ग्रस्त मरीजों का ये आंकड़ा और भी ज्यादा हो सकता है, लेकिन निजी अस्पतालों में करीब आधे प्रत्यारोपण विदेशी नागरिकों के किए जाते हैं। इसकी वजह भारत में प्रत्यारोपण और देशों की तुलना में सस्ता होना है। प्रत्यारोपण के बाद ये नागरिक वापस अपने देश लौट जाते हैं। इनकी निगरानी बाद में नहीं हो पाती।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed