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विश्व हेपेटाइटिस डे: साइबर सिटी में बढ़ रहे हैं हेपेटाइटिस के मरीज 

Thu, 27 Jul 2017 05:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Thu, 27 Jul 2017 05:51 PM IST
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world hepatitis day number of patients increasing in gurugram
demo pic - फोटो : अमर उजाला

साइबर सिटी के लोग हेपेटाइटिस की गिरफ्त में आ रहे हैं। हर वर्ष 20 फीसदी की दर से मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। औसतन जिले में हर वर्ष 1200 मरीज सामने आ रहे हैं, जबकि सरकारी आंकड़ों में जिले में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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जबकि गैर सरकारी संस्था द्वारा किए गए सर्वे में 400 लोगों में से 3.5 फीसदी युवाओं में हेपेटाइटिस बी और सी पाया गया है। डॉक्टरों और गैर सरकारी संस्थाओं का मानना है कि हेपेटाइटिस बी के मुकाबले एचआईवी के मरीजों की संख्या कम है, लेकिन इसके प्रति लोगों में जागरूकता अधिक है।
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जबकि खतरनाक बीमारी हेपेटाइटिस बी और सी के प्रति लोग कम जागरूक हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2013 में 418 हेपेटाइटिस, 2014 में 518 और 2015 में 1634, 2016 में 1379 और 2017 मई तक 892 मरीज आए हैं, जबकि निजी अस्पतालों को मिला दें तो यह आंकड़ा अधिक होता है।
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विभाग के मुताबिक जिले में करीब 20 फीसदी की दर से यह रोग बढ़ रहा है। डॉक्टरों के लिए हेपेटाइटिस-सी अधिक खतरनाक है, अभी तक इसका कारगर इलाज सामने नहीं आया है। फोर्टिस अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोबिलरी साइंस के प्रमुख डॉ. गुरदास चौधरी का कहना है कि हेपेटाइटिस काफी खतरनाक बीमारी है।

यह एक वायरस जनित रोग है, जो आपके लीवर को नुकसान पहुंचाता है। अंतिम स्थिति में हेपेटाइटिस लीवर सिरोसिज और लीवर कैंसर का कारण भी बनता है। हेपेटाइटिस को एड्स से भी ज्यादा घातक रोग माना जाता है। हेपेटाइटिस से मरने वालों की संख्या एड्स से मरने वालों की तुलना में 10 गुना अधिक है। 
 
कई तरह की होती है यह बीमारी
आर्टेमिस अस्पताल के वरिष्ठ हेपाटोलॉजिस्ट डॉ. कौशल मदान कहते हैं कि हेपेटाइटिस मूलरूप से पांच प्रकार का होता है- ए, बी, सी, डी और ई। हेपेटाइटिस डी डेल्टा वायरस है, जो बी के साथ ही मिलता है।

हेपेटाइटिस ए और ई का संक्रमण प्रदूषित खाद्य पदार्थो और दूषित पानी पीने से होता है। साफ-सफाई से न रहने और खाने से पहले कीटाणुनाशक साबुन से हाथ न धोने से इस रोग का जोखिम बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण कई कारणों से रक्त के जरिये होता है।

जैसे सुई से लगी चोट, इंजेक्शन द्वारा ड्रग लेना और हेपेटाइटिस से संक्रमित किसी व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आना। टैटू गुदवाना, किसी संक्रमित व्यक्ति का टूथब्रश और रेजर इस्तेमाल करना और असुरक्षित यौन संपर्क जोखिम बढ़ा सकता है।
 
हेपेटाइटिस के लक्षण और उपाय
पारस अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी डॉ. रजनीश मोंगा बताते हैं हेपेटाइटिस के प्राथमिक लक्षण नहीं है। केवल ब्लड टेस्ट के आधार पर पता किया जा सकता है। हेपेटाइटिस ए और ई के लक्षण 15-30 दिनों के भीतर दिखाई देने शुरू होते हैं।

हेपेटाइटिस बी के लक्षण अंतिम समय में पता चलते हैं। हेपेटाइटिस ए और बी की रोकथाम के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। नवजात बच्चों को ये वैक्सीन लगवानी चाहिए। फिलहाल हेपेटाइटिस ई से बचाव के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। 

 
बरसात में प्रभावित करने वाला हेपेटाइटिस
हेपेटाइटिस ए वायरल संक्रमण है, जो बारिश के कारण हुए संक्रमित भोजन-पानी के सेवन से होता है। यह लीवर को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस ‘ई’ बीमारी वैसे तो साल भर होती रहती है, लेकिन बरसात के मौसम में और बरसात खत्म होते ही इसका प्रकोप बहुत बढ़ जाता है। इससे  बचने का एकमात्र उपाय स्वच्छ पानी पीना है। 

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