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World Hepatitis Day: चोरी छिपे यकृत को कैंसर का शिकार बना रहा फैटी लीवर, इन वजहों से बढ़ रही हैं समस्याएं
Mon, 28 Jul 2025 03:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Jul 2025 03:10 AM IST
सार
हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा को लेकर हुए एक शोध से इसका खुलासा हुआ है। इस शोध में एक तिहाई मरीजों में बिना सिरोसिस के भी लीवर का कैंसर पाया गया।
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फैटी लिवर डिजीज
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
देश में बढ़ रही फैटी लीवर की समस्या से यकृत चोरी-छिपे कैंसर का शिकार हो रहा है। हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा को लेकर हुए एक शोध से इसका खुलासा हुआ है। इस शोध में एक तिहाई मरीजों में बिना सिरोसिस के भी लीवर का कैंसर पाया गया।
विशेषज्ञ बताते हैं कि हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा यकृत (लीवर) का एक कैंसर है, जो यकृत की कोशिकाओं में शुरू होता है। अभी तक यह रोग उन लोगों में पाया जाता था, जिन्हें पुराना लीवर रोग रहा हो। इसमें हेपेटाइटिस बी या सी से लीवर में सिरोसिस (यकृत का सिकुड़ना) होना बढ़ा कारण होता था। लेकिन फैटी लीवर के मरीजों पर हुए शोध में एक तिहाई मरीज में बिना सिरोसिस के भी कैंसर पाया गया। जबकि दो तिहाई मरीज में सिरोसिस होने के बाद कैंसर दिखा।
डॉक्टरों का कहना है कि यह चिंता का विषय है। देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लीवर से पीड़ित है। इनमें चोरी-छुपे कैंसर का होना देश में लीवर के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ा सकता है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने बताया, अक्सर फैटी लीवर के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इस कारण अधिकतर मरीज इसे हल्के में लेते हैं। वह अस्पताल भी तभी आते हैं जब उनमें सिरोसिस की समस्या दिखने लगती है।
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यह है फैटी लीवर की समस्या
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के डॉक्टर शरद मलहोत्रा का कहना है कि फैटी लीवर की समस्या में यकृत में बहुत अधिक वसा जमा हो जाती है। लीवर भोजन और अपशिष्ट पदार्थों के प्रसंस्करण के लिए शरीर का मुख्य अंग है। स्वस्थ लीवर में बहुत कम या बिल्कुल भी वसा नहीं होती। लेकिन बहुत ज्यादा शराब पीने, बहुत ज्यादा खाना खाने से शरीर कुछ कैलोरी को वसा में बदल देता है। यह वसा लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाती है। यदि लीवर के कुल वजन में वसा की मात्रा 5 फीसदी से अधिक हो जाती है, तो आपको फैटी लीवर कहा जाता है।
घट रहे हैं वायरल हेपेटाइटिस से कैंसर के मामले
डॉ. शालीमार ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस को लेकर आईं दवाएं व इलाज के नई तकनीक के कारण वायरल हेपेटाइटिस से होने वाले कैंसर के मामलों में कमी आ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी लीवर कैंसर के खतरे को काफी बढ़ा सकते हैं। यह लंबे समय तक शरीर में रहकर लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। समय के साथ इनके इलाज में सुधार हुआ है।
इस कारण बढ़ रही फैटी लीवर की समस्या
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विशेषज्ञ बताते हैं कि हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा यकृत (लीवर) का एक कैंसर है, जो यकृत की कोशिकाओं में शुरू होता है। अभी तक यह रोग उन लोगों में पाया जाता था, जिन्हें पुराना लीवर रोग रहा हो। इसमें हेपेटाइटिस बी या सी से लीवर में सिरोसिस (यकृत का सिकुड़ना) होना बढ़ा कारण होता था। लेकिन फैटी लीवर के मरीजों पर हुए शोध में एक तिहाई मरीज में बिना सिरोसिस के भी कैंसर पाया गया। जबकि दो तिहाई मरीज में सिरोसिस होने के बाद कैंसर दिखा।
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डॉक्टरों का कहना है कि यह चिंता का विषय है। देश में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लीवर से पीड़ित है। इनमें चोरी-छुपे कैंसर का होना देश में लीवर के कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ा सकता है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. शालीमार ने बताया, अक्सर फैटी लीवर के शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इस कारण अधिकतर मरीज इसे हल्के में लेते हैं। वह अस्पताल भी तभी आते हैं जब उनमें सिरोसिस की समस्या दिखने लगती है।
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यह है फैटी लीवर की समस्या
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के डॉक्टर शरद मलहोत्रा का कहना है कि फैटी लीवर की समस्या में यकृत में बहुत अधिक वसा जमा हो जाती है। लीवर भोजन और अपशिष्ट पदार्थों के प्रसंस्करण के लिए शरीर का मुख्य अंग है। स्वस्थ लीवर में बहुत कम या बिल्कुल भी वसा नहीं होती। लेकिन बहुत ज्यादा शराब पीने, बहुत ज्यादा खाना खाने से शरीर कुछ कैलोरी को वसा में बदल देता है। यह वसा लीवर की कोशिकाओं में जमा हो जाती है। यदि लीवर के कुल वजन में वसा की मात्रा 5 फीसदी से अधिक हो जाती है, तो आपको फैटी लीवर कहा जाता है।
घट रहे हैं वायरल हेपेटाइटिस से कैंसर के मामले
डॉ. शालीमार ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस को लेकर आईं दवाएं व इलाज के नई तकनीक के कारण वायरल हेपेटाइटिस से होने वाले कैंसर के मामलों में कमी आ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी लीवर कैंसर के खतरे को काफी बढ़ा सकते हैं। यह लंबे समय तक शरीर में रहकर लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। समय के साथ इनके इलाज में सुधार हुआ है।
इस कारण बढ़ रही फैटी लीवर की समस्या
- मोटापा
- खराब आहार
- शारीरिक निष्क्रियता व उचित व्यायाम न करना
- मधुमेह
- शराब का सेवन
- उच्च कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स
- तेजी से वजन कम होना
- पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम