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विश्व पर्यावरण दिवस विशेष : एक दशक में 20 फीसदी तक कम हो गई हरियाली
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:36 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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तेजी से बढ़ रहे कंक्रीट के जंगल और विकास के नाम पर की गई पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पिछले एक दशक में 20 फीसदी हरियाली कम हुई है। सबसे अधिक नुकसान अरावली पर्वत श्रृंखला के मांगरवनी, नूंह, फिरोजपुर झिरका और मेवात में हुआ है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेड़ों की बलि दी गई, लेकिन बदले में उतने पेड़ नहीं लगाए गए।
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यही नहीं मेट्रो प्रोजेक्ट और हाईवे सिक्सलेन प्रोजेक्ट में भी हजारों की संख्या में पेड़ काटे गए। मेट्रों ने अपने ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत पेड़ तो लगा दिए लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अभी तक पौधरोपण नहीं कर पाया है। लगातार कम होते पेड़ों की संख्या के कारण पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है।
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वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक रहे सीआर जोतरीवाल का कहना है कि एसएसआई देहरादून की रिपोर्ट के मुताबिक अरावली वन क्षेत्र को सबसे अधिक नुकसान खनन माफियाओं और बिल्डरों ने पहुंचाया है। उनका दावा है कि वर्ष 2004 के बाद करीब 15 से 20 फीसदी तक हरियाली में कमी आई है।
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पेड़ कटे पर लगे नहीं
बदरपुर बॉर्डर से होडल तक सिक्स लेन बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हाईवे के किनारे लगे 25 हजार से अधिक पेड़ काट दिए। उसके बदले में मेवात क्षेत्र में पेड़ लगाए जाने थे लेकिन अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। जोतरीवाल का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में विकास के नाम पर लाखों की संख्या में पेड़ काटे गए।
3.33 फीसदी है वन क्षेत्र
वन विभाग के मानक के अनुसार कुल भौगोलिक क्षेत्र का 20 फीसदी वन क्षेत्र होना चाहिए। चूंकि प्रदेश मैदानी क्षेत्र होने के कारण यहां का कुल वन क्षेत्र 3.5 फीसदी है। इनमें फरीदाबाद की बात करें तो यहां का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 742.90 स्क्वायर किमी है जिसमें 7000 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। जो भौगोलिक क्षेत्र का 3.33 फीसदी है।
कचरे से हो रहा है पर्यावरण को नुकसान
नगर निगम ने 76 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2009 में अरावली पहाड़ियों के बीचों बीच बंधवाड़ी गांव में कूड़ा ट्रीटमेंट प्लांट बनाया था। जिसमें हर रोज फरीदाबाद व गुड़गांव का 1000 टन से अधिक का कूड़ा निस्तारण होता था। लेकिन साल 2013 में ये प्लांट तकनीकी खामियों की वजह से बंद हो गया। इस प्लांट के बंद होने के बावजूद फरीदाबाद व गुड़गांव नगर निगम का हर रोज करीब 1000 टन कूड़ा यहां डंप किया जा रहा है। जिससे अरावली पहाड़ियों के बीच बसे गांवों का वातावरण खराब हो रहा है। यही नहीं लगातार सड़कों पर बढ़ते वाहनों के दबाव से भी पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
50 साल में एक पेड़ इतने काम आता है
-17.50 लाख रुपये की आक्सीजन का उत्पादन।
-41 लाख रुपये के पानी की रिसाईकिलिंग।
-300 पेड़ मिलकर खत्म कर सकते हैं एक व्यक्ति द्वारा जीवनभर फैलाया गया प्रदूषण।
-एक पेड़ तीन फीसदी तक तापमान को कम कर सकता है।
-3 किलो कार्बनडाई ऑक्साइड सोखता है हर साल
वन विभाग वनों को संरक्षित करने के लिए गंभीर है। हर साल एक टारगेट निर्धारित कर पौधे लगाए जाते हैं। निश्चित रूप से विकास के लिए पेड़ों की कटाई की गई है। हम सभी को मिलकर वन क्षेत्र को संरक्षित और पर्यावरण को शुद्ध बनाना होगा।-रंजीता, जिला वन अधिकारी