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विश्व एड्स दिवस: मरीजों की बढ़ती संख्या में निर्दोष लोग भी शामिल, चौंकाने वाली बात आई सामने

Sat, 01 Dec 2018 09:04 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 01 Dec 2018 09:04 AM IST
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World AIDS Day increasing number of HIV positive patients included innocents

यूं तो एचआईवी संक्रमित मरीजों में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है लेकिन खास ये है कि मरीजों की बढ़ती संख्या में वे निर्दोष लोग भी शामिल हैं जिनका कोई दोष नहीं। इस साल जनवरी से नवंबर तक औद्योगिक नगरी में 315 एचआईवी पॉजिटीव मरीज सामने आए हैं। विभाग का कहना है कि 84 फीसदी मामले यौन संबंधों से होते हैं, लेकिन इसके बाद संक्रमित ड्रग या संक्रमित इंजेक्शनों या फिर माता-पिता से भी हो जाते हैं।

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आखिर सवाल ये है कि जो खुद के लिए जिम्मेदार हैं वे इतर हैं लेकिन जिनका कोई दोष नहीं, वे भी पूरी जिंदगी इस बीमारी से खुद को उबारने में लगे रहते हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इसमें कुछ छात्र-छात्राएं और बच्चे भी हैं जो हमारे आपके सामने सामान्य जिंदगी जीते हैं लेकिन काउंसलिंग और आत्ममंथन में ये बात जरूर उठाते हैं कि आखिर उनका क्या दोष है। 
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ताउम्र की बीमारी
बीके सिविल अस्पताल स्थित जांच केंद्र में तैनात काउंसलर कविता सिंह बताती हैं कि दो ऐसे मरीज भी आए जिनकी उम्र मात्र 2 वर्ष की रही होगी। इस बीमारी में उनका कोई दोष नहीं फिर भी उन्हें ताउम्र इससे लड़ना होगा। 
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कहां से हुआ संक्रमण, पता नहीं
दरअसल, कुछ ऐसे केस भी हैं जिनको इस संक्रमण के बारे में पता ही नहीं कि कहां से हुआ। जब परेशानी होने लगी तो जांच-पड़ताल कराई गई। इसके बाद जो सामने आया, वो न किसी को बताने लायक था और न ही खुद समझने लायक। काउंसलर के अनुसार, कुछ ऐसे युवा भी हैं जिन्हें एड्स ऐसे संबंधों से नहीं बल्कि संक्रमित खून या सीरिंज आदि से हुआ होगा, लेकिन आज वे मजबूर हैं ऐसी बीमारी के लिए। बीके अस्पताल के जांच केंद्र की काउंसलिंग सेल में कई लोग ऐसे भी आते हैं जो एचआईवी पीड़ित हैं लेकिन शादी करना चाहते हैं। कविता बताती हैं कि एक पीड़ित को शादी के लिए एचआईवी पीड़िता के बारे में यहीं बताया गया ताकि सुरक्षित वैवाहिक जीवन रहे। बाद में दोनों ने शादी कर ली और आज सुखी हैं। 

दूसरों के लिए बने प्रेरणा      

फरीदाबाद निवासी एक युवती की शादी कुछ साल पहले एचआईवी संक्रमित युवक से हो गई। पति के संपर्क में आने के बाद महिला भी एचआईवी पीड़ित हो गई। कुछ समय पहले महिला के पति का देहांत हो गया तो उसके साथ ऑफिस में काम करने वाले एक युवक ने समाज व परिवार के विरोध के बावजूद उस महिला से शादी की। महिला का नियमित इलाज चल रहा है, जबकि उसका पति भी समय-समय पर अपनी जांच करवाता रहता है और ठीक है। ऐसे में दोनों अपना सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं।      
     
वहम का इलाज नहीं 
कविता सिंह के अनुसार पिछले करीब 10 साल से एक व्यक्ति उनके पास थोड़े-थोड़े समय में अपनी जांच करवाने आता है। उस व्यक्ति ने अपनी शादी से पहले किसी महिला के साथ संबंध बनाए थे। बाद में किसी ने उसे बताया कि महिला एचआईवी पीड़ित है। इस पर उसने अपनी जांच करवाई तो एचआईवी नेगेटिव पाया गया। उस व्यक्ति को वहम हो गया कि उसे एड्स हो गया है। उस घटना के बाद उस व्यक्ति की शादी हुई और अब दो बेटियां भी हैं। इसके बावजूद वह फिर भी परेशान रहता और अपनी जांच करवाता रहता है।      
  
रक्त चढ़ने के तीन माह तक नहीं पता चलता वायरस का 
किसी व्यक्ति को रक्त चढ़ने के तीन माह बाद तक उसे संक्रमित खून चढ़ने के बारे में पता नहीं चल पाता है। कविता सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने आज अपना खून किसी को दिया और वह एचआईवी संक्रमित है तो उसके बारे में पीड़ित को कम से कम तीन माह बाद पता चल सकेगा। रक्त चढ़ने के तीन माह बाद एचआईवी का वायरस सक्रिय होता है। ऐसे में संक्रमित रक्त वाले मरीजों की संख्या भी ज्यादा है।     

एचआईवी के प्रति स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। लगातार जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। हर शनिवार को उद्योगों, स्लम, ईट भट्टों आदि में जागरूकता शिविर लगाए जाते हैं। लोगों की काउंसलिंग और जांच की जाती है। औद्योगिक नगरी होने के कारण यहां बाहर से आकर रहने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। इस कारण यहां आंकड़ों में भी बढ़ोतरी हुई हैं। - डा. शीला भगत, उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी (एचआईवी व टीबी विभाग) 

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