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'बिल्डरों की मनमानी से हो रहे हैं हादसे'
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Thu, 15 May 2014 07:55 PM IST
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गुड़गांव के सेक्टर-90 में पानी की टंकी फटने से चार श्रमिकों की मौत मामले को भवन निर्माण कामगार यूनियन ने गंभीरता से लिया है।
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यूनियन का कहना है कि बिल्डर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते। जिससे आए दिन मजदूरों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। श्रम विभाग भी ऐसे मामलों में सख्ती बरतने के स्थान पर लचर प्रदर्शन करता है, लेकिन अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भवन निर्माण कामगार यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष वीरेंद्र मालिक और और जिला अध्यक्ष कोमल सिंह ने मजदूरों की मौत पर शोक व्यक्त किया। इनका कहना है कि दुर्घटनाओं का मुख्य कारण काम के स्थान पर सुरक्षा इंतजामों अभाव है। इसके लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का बिल्डर पालन नहीं करते हैं। मलिक ने कहा कि गुड़गांव में दो लाख से ज्यादा निर्माण मजदूर काम करते हैं।
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श्रमिकों के कल्याण के लिए गठित निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में श्रमिकों का पंजीकरण श्रम विभाग ने नहीं कराया है। यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि यही वजह है कि अब तक ऐसी दुर्घटनाओं में मारे गए श्रमिकों के आश्रितों को सहायता नहीं मिल पाती। जबकि नियम के अनुसार मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपये की मृत्यु सहायता राशि मिलनी चाहिए। कल्याण बोर्ड के पास 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि एकत्र हो चुकी है।
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टैंक फटने से मरे मजदूरों का हुआ पोस्टमार्टम
गुड़गांव में खेड़कीदौला थाना क्षेत्र के सेक्टर 90 में मंगलवार की रात को पानी का टैंक फटने से मरे चार मजदूरों के शव का पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। मंगलवार रात सिंप्लैक्स निर्माण कंपनी परिसर में मजदूरों के लिए बनाए गए तीस हजार लीटर का पानी का टैंक फट गया था। उसकी चपेट में आने से वह नहा रहे चार मजदूरों की मौत हो गई थी जबकि एक मजदूर घायल हो गया था।
पुलिस ने मृतकों की पहचान छतरपुर झारखंड निवासी स्वर्ण राम (19) पुत्र मगर देव, रसूलपुर दरभंगा बिहार निवासी गन्नौर पंडित उर्फ मुखिया (45) पुत्र जगनंदन व प्रमोद शाह (35) पुत्र सुरेंद्र शाह तथा मोजमपुर कालिया चौक पश्चिम बंगाल निवासी जोसीम (25) पुत्र मो. भादू के रुप में की थी। इसके अलावा इनका एक और रिंकू टैंक की चपेट में आ गया था जिसका उपचार निजी अस्पताल में चल रहा है। उसकी हालत अब खतरे से बाहर बतायी जा रही है।
उन्होंने बताया कि कंपनी की तरफ से निर्णय लिया गया है कि श्रम कानून के तहत जो भी मुआवजा बनता है मृतकों के परिजनों को दिया जाएगा। इसके अलावा भी उनके परिजन अगर किसी तरह की सहायता चाहते हैं तो कंपनी उनकी सहायता करेगी। कंपनी सभी मृतकों के दाह संस्कार से लेकर उनके अन्य क्रियाकर्म का पूरा खर्च भी उठा रही है। इसके अलावा घायल के उपचार का खर्च व घायल को कंपनी ही उठाएगी।