{"_id":"5f27552d6350191a757e3b81","slug":"work-should-be-done-again-on-water-treaty-to-bring-yamuna-to-earlier-position-says-ngt","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनजीटी की सिफारिश, यमुना को पहले की स्थिति में लाने के लिए जल संधि पर फिर हो काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनजीटी की सिफारिश, यमुना को पहले की स्थिति में लाने के लिए जल संधि पर फिर हो काम
Mon, 03 Aug 2020 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 03 Aug 2020 05:37 AM IST
विज्ञापन
यमुना...
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा नियुक्त यमुना निगरानी समिति ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली के बीच हुए 1994 जल बंटवारा समझौते पर फिर से काम करने की सिफारिश की है ताकि साल भर यमुना नदी में पर्यावरणीय बहाव बना रहे।
विज्ञापन
एनजीटी के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ बीएस साजवान और दिल्ली की पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा की दो सदस्यीय समिति ने यह सिफारिश ‘नदी के दिल्ली क्षेत्र के लिए ई-प्रवाह’ पर मसौदा रिपोर्ट के आधार पर की है।
विज्ञापन
पर्यावरणीय प्रवाह के लिए नदी को सही स्थिति या पूर्व निर्धारित स्थिति में बनाए रखने जरूरी है। समिति ने कहा है कि हथिनीकुंड बैराज पर पर्यावरणीय प्रवाह की मंजूरी के लिए जल शक्ति मंत्रालय, अपर यमुना रिवर बोर्ड और उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली को 1994 के जल बंटवारा समझौते पर फिर से काम करना चाहिए।
विज्ञापन
रिपोर्ट रूड़की स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी ने तैयार की है। इसमें कहा गया है कि हरियाणा के यमुना नगर जिले में स्थित हथिनीकुंड बैराज से जनवरी और फरवरी में 10 क्यूमेक की जगह 23 क्यूमेक पानी छोड़ा जाना चाहिए ताकि डाउनस्ट्रीम इकोसिस्टम बना रहे।
बैराज से हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लिए पश्चिमी और पूर्वी यमुना कैनाल से कृषि के लिए और दिल्ली के जलापूर्ति के पानी छोड़ा जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च, अप्रैल, मई और जून में क्रमश: 26 क्यूमेक, 29 क्यूमेक, 34 क्यूमेक और 44 क्यूमेक पानी छोड़ा जाना चाहिए। मौजूदा वक्त में मार्च, अप्रैल और मई में 10 क्यूमेक और जून में 18 क्यूमेक पानी छोड़ा जाता है।