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गर्म कपड़ों का बाजार बदहाल, दुकानदारों को ग्राहकों का इंतजार

Wed, 14 Dec 2016 10:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Wed, 14 Dec 2016 10:58 AM IST
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woolen cloths industry is not performing good after demonetization
- फोटो : डेमो प‌िक

सर्दी जबरदस्त पड़ने लगी है। इस मौसम में हौजरी यानि कि गर्म कपड़े बेचने वालों की दुकान पर ग्राहकों की लंबी लाइन लगी रहती थी। लेकिन इस बार नोटबंदी के बाद से हौजरी की दुकानों पर ग्राहक की इंतजार में दुकानदार बैठे दिखाई दे रहे हैं।

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गर्म कपड़ों की बिक्री न के बराबर है। दुकानदारों का कहना है कि नोटबंदी के बाद से दुकान पर काम करने वाले लड़कों की तनख्वाह का खर्चा भी नहीं निकल रहा है। नोटबंदी का अच्छा खासा असर गर्म कपड़ों को बेचने वाले दुकानदारों पर भी पड़ रहा है।
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पिछले वर्ष के मुकाबले इनकी दुकानदारी दस फीसदी भी नहीं रही है। घंटों-घंटो ग्राहक की इंतजार में दुकानदारों के बैठे रहने के बाद भी ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे हैं। ना तो लोगों की  जेब में दाम हैं और न ही वे गर्म कपड़े खरीद रहे हैं।
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दुकानदारों की तैयारी धरी की धरी रह गई है। इस बार स्टाक में काफी गर्म कपड़ों की बचने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी की सराहना किए बिना दुकानदार नहीं रहे।

झिरका वस्त्र व्यापार संघ के प्रधान यश चावला ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि प्रधानमंत्री के नोटबंदी की मार गर्म कपड़ों की बिक्री पर पड़ी है। पिछले वर्ष के मुकाबले गर्म कपड़ों की सेल दस प्रतिशत रह गई है।

लोग पहले अपने जमीदारा के काम को कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक निर्णय लेकर बहुत अच्छा काम किया है। यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था। -यश चावला, प्रधान झिरका वस्त्र व्यापार संघ, फिरोजपुर झिरका।

कई-कई घंटों तक दुकान पर एक भी ग्राहक नहीं आ रहा है। सर्दी के मौसम में पूरा सीजन रहता है। लेकिन इस बार तो दूर-दूर तक ग्राहक दिखाई नहीं दे रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैंसले से देश आगे बढ़ेगा और समाज में समानता आएगी, लोग फिजूल खर्ची से बचेंगे। -दिनेश बंसल, नगर पार्षद एवं पूर्व प्रधान झिरका वस्त्र व्यापार संघ।

सर्दी के मौसम के आने से पहले ही काफी संख्या में रजाई सिलवाकर तैयार करवानी पड़ती हैं ताकि सर्दी के सीजन में किसी को परेशानी न हो। स्टाक भी पहले से ही पूरा करना पड़ता है। लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं थी कि नोटबंदी के बाद गर्मक पड़ों की बिक्री पर इतना जबरदस्त फर्क पड़ेगा। -अग्रसैन गोयल, कपडे़ के थोक व्यापारी


प्रधानमंत्री के निर्णय का दिल से स्वागत करते हैं। मंदी की मार को तो झेल लिया जाएगा। लेकिन यदि काला धन बाहर आता है और देश का विकास तीव्र गति से होता है, भ्रष्ट्राचार रुकता है तो हम समझेंगे कि प्रधानमंत्री के इस महायज्ञ में व्यापारी वर्ग ने भी अपनी आहूती देकर अपने आप को धन्य कर लिया है। -अशोक गोयल, कपड़े के थोक व्यापारी।

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