Delhi Assembly Elections 2025 : सियासत के केंद्र में महिलाएं अहम, अपने पाले में करने की जुगत में सभी दल
सभी राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए अलग से योजनाएं बनाकर घोषणा कर रहे हैं। एक समय दिल्ली में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कम मतदान करती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
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दिल्ली की सियासी जंग में इस बार महिला वोटर केंद्र में हैं। सभी राजनीतिक दल महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए अलग से योजनाएं बनाकर घोषणा कर रहे हैं। एक समय दिल्ली में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कम मतदान करती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। महिलाएं मतदान करने में पुरुषों को भी पीछे कर रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर महिलाएं पुरुषों से मतदान करने में आगे रहींं। हालांकि, कुल मतदान में महिलाओं का मतदान फीसदी पुरुष मतदाताओं से मात्र 0.08 फीसदी पीछे रहा। यही कारण है कि इस बार दिल्ली की सियासत में महिला वाेटर काफी अहम भूमिका निभाएंगी।
दरअसल, 1993 से लेकर 2020 तक हुए सात विधानसभा चुनावों में शुरुआती चार चुनावों में महिला मतदाताओं का मत फीसदी 60 प्रतिशत से कम रहा है। पहले चुनाव 1993 में महिलाएं मतदान फीसदी में पुरुष मतदाताओं से 6.29 फीसदी पीछे रही थीं। इसके बाद के सभी चुनावों में महिलाओं के मतदान फीसदी में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 1998 के चुनाव में 4.48 फीसदी, 2003 में 3.37, 2008 में 1.72, 2013 में 0.90, 2015 में 1.14 फीसदी पीछे रहीं।
वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में महिलाएं पुरुष मतदाताओं से मात्र 0.08 फीसदी ही पीछे रही थीं। 2008 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सरकार ने लाडली योजना शुरू की थी। योजना में एक लाख से कम आय वाले लोगों के घर बेटी का जन्म होने पर शिक्षा के लिए दस हजार रुपये जमा करने का प्रावधान किया गया था। इससे चुनाव में महिलाओं का मतदान फीसदी तो बढ़ा ही, पुरुषों व महिलाओं के बीच मत प्रतिशत का अंतर भी सिमट कर दो प्रतिशत से नीचे आ गया। इसके बाद हुए तीन विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
तीन बार महिलाएं रहीं आगे
2013 के विधानसभा चुनावों में 22 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं का मतदान फीसदी पुरुषों से अधिक रहा। 2015 में 15 विधानसभा क्षेत्रों में महिलाएं पुरुष मतदाताओं से आगे रहीं। वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर महिलाएं पुरुष मतदाताओं से आगे रहीं। इस चुनाव से एक साल पहले 2019 में महिलाओं के लिए डीटीसी बसों में मुफ्त सफर की योजना शुरू की गई थी। जिन 31 सीटों पर महिलाओं का मतदान फीसदी पुरुषों से अधिक रहा, उनमें से 28 सीटों पर आप जीती थी, जबकि तीन सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी।
चुनाव वर्ष- कुल मतदान- पुरुष- महिला-अंतर
- 1993--61.75--64.56--58.27--6.29
- 1998--48.99--50.89--46.41--5.58
- 2003--53.42--54.89--51.53--3.66
- 2008--57.58--58.34--56.62--1.72
- 2013--65.63--66.03--65.14--0.89
- 2015--67.12--67.63--66.49--1.14
- 2020--62.55--62.59--62.51--0.08
2020 में इन सीटों पर महिलाएं पुरुषों से रहीं आगे/ विधानसभा क्षेत्र- महिला मत- पुरुष मत- अंतर
- ओखला- 62.15- 56.60- 5.55
- दिल्ली कैंट- 48.45- 43.17- 5.28
- संगम विहार- 63.93- 60.87- 3.06
- छतरपुर- 66.19- 63.25- 2.94
- आरके पुरम- 58.04- 55.66- 2.38
- महरौली- 57.49- 55.77- 1.72
- तुगलकाबाद- 61.62- 60.20- 1.42
- बुराड़ी- 61.99- 60.65- 1.34
- बदरपुर- 60.25- 58.97- 1.28
- त्रिलोकपुरी- 67.14- 65.93- 1.21
- द्वारका- 62.64- 61.45- 1.19
- पटपड़गंज- 61.85- 60.83- 1.0