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डॉक्टर की सलाह को न करें इग्नोर: नियोजित गर्भधारण से जच्चा-बच्चा होंगे सुरक्षित, संक्रमण का खतरा होगा कम
Fri, 11 Apr 2025 08:52 AM IST
अनुज कुमार
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 11 Apr 2025 08:52 AM IST
सार
देश में आज भी कई लोग परिवार नियोजन पर सलाह नहीं लेते हैं। अनप्लानड गर्भधारण करने की वजह से महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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गर्भवती महिला
- फोटो : एआई तस्वीर
विस्तार
नियोजित गर्भधारण से जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहेंगे। इनमें संक्रमण सहित दूसरे रोग होने की आशंका कम होगी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि देश में गर्भधारण करने से पहले महिलाएं डॉक्टरों की परिवार नियोजन पर सलाह नहीं लेती हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अनप्लानड गर्भधारण में महिलाओं को कई तरह की परेशानी होती है। कई बार महिलाएं रोगों के साथ गर्भधारण करती हैं जिससे गर्भ में बच्चे की बनावट, उसका विकास प्रभावित होता है।
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कई बार गर्भपात तक हो जाता है। मां की समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे बचने के लिए डॉक्टर महिलाओं को गर्भधारण करने से पहले उनसे सलाह लेने का सुझाव देते हैं। यदि महिलाएं गर्भधारण करने से पहले पूरी प्लानिंग कर लें तो डिलीवरी या गर्भकाल के दौरान होने की वाली समस्याओं को पूरी तरह से रोका जा सकता है।
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डॉक्टरों का कहना है कि देश में अभी भी प्रति एक लाख महिलाएं पर 97 महिलाएं डिलीवरी के दौरान दम तोड़ देती हैं। सफदरजंग अस्पताल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. बिंदु बजाज ने बताया कि महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित बना सकते हैं। विभाग की डॉ. उपमा सक्सेना का कहना है कि यदि महिलाएं डॉक्टर की सलाह पर परिवार नियोजन करते हैं तो मां और बच्चे में कोई बीमारी या रोग नहीं होगी।
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गर्भ में पल रहे बच्चे को मिल सकता है इलाज
डॉ. मोलश्री गुप्ता का कहना है कि आज गर्भ में विकसित हो रहे शिशु (भ्रूण) के स्वास्थ्य को देखा जा सकता है। उसी आधार पर निदान और उपचार मौजूद है। आंकड़े बताते हैं कि करीब 3-5 फीसदी बच्चे किसी न किसी जन्मजात विकार के साथ पैदा होते हैं। फीटल मेडिसिन से इन जटिलताओं को समय पर पहचान सकते हैं। साथ ही इसका इलाज करना संभव है। यदि महिलाएं जागरूक रहेंगी तो समस्याओं को समय पर दूर किया जा सकता है।
20 फीसदी बच्चे समय से पहले हो जाते हैं पैदा
डिलीवरी से पहले होने वाली परेशानी के कारण देश में करीब 20 फीसदी बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह बच्चे गर्भ में 37 सप्ताह पूरा नहीं कर पाते। जबकि गर्भ में नौ माह रहने पर बच्चे का विकास अच्छी तरह से होता है। प्रीमैच्योर बच्चों में कई तरह की समस्याएं होती हैं। कई बार जिंदगी भर बच्चे परेशान रहते हैं। इसका सीधा असर मां के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। वह तनाव व अवसाद में घिर जाती है।
गर्भवती महिलाओं की होती है जांच
- बीपी
- मधुमेह
- थायराइड
- एनीमिया
- हेपेटाइटिस बी
इन मरीजों की दवाओं में होता है बदलाव
- मृगी रोगी
- दिल के रोगी
- दूसरे रोग जिसकी दवाएं चल रहीं हो
किया जाता है टीकाकारण
- इंफ्लूएंजा
- काली खासी
- मिजल और रूबेला
- हेपेटाइटिस बी
- एनीमिया
बढ़ेगी ओटी की सुविधा
सफदरजंग अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में ऑपरेशन थियेटर (ओटी) की संख्या बढ़ेगी। अभी डिलीवरी के लिए दो ओटी में दिन रात सर्जरी होती है। बावजूद इसके ऑपरेशन के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में गंभीर महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है। महिलाओं की समस्याओं को देखते हुए एक और ओटी बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सफदरजंग अस्पताल का आंकड़ा
-हर साल जन्म लेते हैं बच्चे - 26 से 27 हजार
-रोजाना ओपीडी में आती है गर्भवती - 500 से
-प्रीमैच्योर बच्चे की डिलीवरी - करीब 20 फीसदी