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इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 7 करोड़ ठगे, 13 फर्जी कंपनी और 15 खातों से की ठगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 20 Sep 2018 04:51 AM IST
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इंश्योरेंस पॉलिसी पर मोटा बोनस देने का झांसा देकर देशभर के भोले-भाले लोगों से सात करोड़ से अधिक की ठगी करने वाली महिला और उसके साथी को उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने दबोचा है। इनकी पहचान जवाहर लाल नेहरू डिग्री कॉलेज, एटा निवासी मधुवेंद्र सिंह उर्फ संजय (31) और दिल्ली के शकरपुर निवासी रेनू पांडेय उर्फ ऋषि पांडेय (28) के रूप में हुई है।
आरोपियों ने फर्जी कागजात से 13 कंपनियां बनाई हुई थी। बैंकों में 15 खाते भी खोले थे। इन खातों के जरिये 2016 से अब तक 7 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है।
उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त असलम खान ने बताया कि वर्ष 2016 में मोर्य एन्क्लेव इलाके में कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग से इंश्योरेंस पॉलिसी पर बोनस के नाम पर मोटी रकम ठग ली थी।
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लोकल पुलिस और स्पेशल स्टाफ ने भी छानबीन शुरू की। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एकेेे लाल और इंस्पेक्टर सतविंदर राणा की टाम ने छानबीन के बाद मधुवेंद्र को यूपी से दबोचा। इसके बाद टेक्निकल सर्विलांस से रेनू को दिल्ली के शकरपुर इलाके से पकड़ा गया।
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आरोपियों ने फर्जी कागजात से 13 कंपनियां बनाई हुई थी। बैंकों में 15 खाते भी खोले थे। इन खातों के जरिये 2016 से अब तक 7 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है।
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उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त असलम खान ने बताया कि वर्ष 2016 में मोर्य एन्क्लेव इलाके में कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग से इंश्योरेंस पॉलिसी पर बोनस के नाम पर मोटी रकम ठग ली थी।
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लोकल पुलिस और स्पेशल स्टाफ ने भी छानबीन शुरू की। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त एकेेे लाल और इंस्पेक्टर सतविंदर राणा की टाम ने छानबीन के बाद मधुवेंद्र को यूपी से दबोचा। इसके बाद टेक्निकल सर्विलांस से रेनू को दिल्ली के शकरपुर इलाके से पकड़ा गया।
निशाने पर रहते थे बुजुर्ग
12वीं पास मधुवेंद्र इंश्योरेंस कंपनी से जुड़े कई कॉल सेंटर में काम कर चुका है। उसकी दोस्ती शादीशुदा रेनू पांडेय से है। दोनों मिलकर अपना कॉल सेंटर चलाते थे।
दोनों खुद को बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए), बैंक और अन्य कई सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि बताते थे। इनसे फर्जी कागजात भी बरामद हुए हैं।
इनके निशाने पर ऐसे बुजुर्ग रहते थे जो इंश्योरेंश सेक्टर में निवेश करना चाहते थे या उन्होंने पहले से निवेश कर रखा था। उन्हें उनकी मौजूदा इंश्योरेंस पॉलिसी पर मोटा बोनस देने का झांसा दिया जाता था।
बोनस देने के बदले आरोपी कुछ सिक्योरिटी मनी, टैक्स व अन्य मद का बहाना कर रुपये अपने खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कराते थे।
दोनों खुद को बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए), बैंक और अन्य कई सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधि बताते थे। इनसे फर्जी कागजात भी बरामद हुए हैं।
इनके निशाने पर ऐसे बुजुर्ग रहते थे जो इंश्योरेंश सेक्टर में निवेश करना चाहते थे या उन्होंने पहले से निवेश कर रखा था। उन्हें उनकी मौजूदा इंश्योरेंस पॉलिसी पर मोटा बोनस देने का झांसा दिया जाता था।
बोनस देने के बदले आरोपी कुछ सिक्योरिटी मनी, टैक्स व अन्य मद का बहाना कर रुपये अपने खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कराते थे।