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अमिताभ पर आरोप लगाने वाली महिला का सपा कनेक्शन

Tue, 14 Jul 2015 07:29 PM IST
Updated Tue, 14 Jul 2015 07:29 PM IST
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Woman accused ips amitabh thakur have sp connection

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर पर बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिला का परिवार सपा से जुड़ा है। महिला का पति तो पार्टी में लगातार सक्रिय है। कविनगर में रहने वाली एक वरिष्ठ सपा नेत्री से इस परिवार की नजदीकी है।

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एक आला मंत्री की नजदीकी उक्त नेत्री ही इस परिवार को पिछले सप्ताह लखनऊ लेकर गई थीं। आईपीएस पर बलात्कार का आरोप लगाने के बाद से इस परिवार ने खुलकर पार्टी आयोजनों में शामिल होना कम कर दिया है।
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वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला और उसके पति का सपा से वास्ता न होने का दावा झूठा निकला। अमर उजाला ने आरोपी परिवार का सपा कनेक्शन खोज निकाला।
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महिला के पति ने छपवाए विजिटिंग कार्ड

Woman accused ips amitabh thakur have sp connection

शहर के इंद्रगढ़ी में रहने वाला यह परिवार लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़ा है। महिला के पति ने खुद को वरिष्ठ कार्यकर्ता बताते हुए धौलाना विधानसभा क्षेत्र के विजिटिंग कार्ड भी छपवाए हुए हैं।

महिला और उसका पति गाजियाबाद, धौलाना और मुरादनगर विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं। बलात्कार मामले में चर्चित होने के बाद से पार्टी पदाधिकारियों ने इस मामले में ऑनरिकार्ड बोलना बंद कर दिया है।

जनपद हापुड़ के सपा जिलाध्यक्ष किशन सिंह तोमर और गाजियाबाद सपा संगठन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे राहुल चौधरी ने महिला और उनके पति से परिचित होने से इंकार कर दिया है।

जुबां पर आया रिटायर्ड अधिकारियों का दर्द

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सत्ता के गलियारों में आईजी सिविल डिफेंस अमिताभ ठाकुर और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह का मामला चर्चा में आया तो रिटायर्ड अधिकारियों का दर्द भी उनकी जुबां पर आने लगा।

रिटायरमेंट के बाद गाजियाबाद में अपना आशियाना बनाकर रहने वाले कई आईपीएस अधिकारियों ने वर्तमान राजनीति पर सीधी चोट की।

यूपी में ही उच्च पदों पर आसीन रह चुके इन अधिकारियों का तो यहां तक कहना था कि ‘देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा आईएएस में सफल होना इतना कठिन नहीं जितना यूपी में काम करना है।

बच्चों को रखा हॉस्टल में

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उत्तर प्रदेश के रिटायर्ड डीजीपी और 1974 बैच के आईपीएस अधिकारी विक्रम सिंह ने बताया कि आईपीएस अमिताभ ठाकुर द्वारा लगाए आरोप कोई नई बात नहीं है।

आईपीएस बनने के बाद पहले दिन से ही उन्हें भी राजनीतिक दबाव झेलना पड़ा। दबाव ऐसा था कि बच्चों को नर्सरी कक्षा से ही हॉस्टल में पढ़ाया।

सत्ताधारी नेताओं की बात न मानें तो अगले ही दिन ट्रांसफर हो जाता था। ट्रांसफर भी ऐसी जगह कि वहां परिवार के साथ रहना बड़ा खतरा था।

तीन-चार माह में हो जाता था ट्रांसफर

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वर्ष 1977 बैच के पीपीएस और 1991 में आईपीएस कैडर प्राप्त करने वाले रिटायर्ड डीआईजी इलाहबाद अशोक कुमार त्यागी का एक पोस्ट पर सबसे लंबा कार्यकाल 9 माह का रहा।

वह बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में काम करना शायद सबसे मुश्किल था। नेता सिफारिश लेकर आते और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता था। बस अगले कुछ ही दिनों में उनका जिला बदल जाता।

वह मानते हैं कि मुजफ्फरनगर दंगा भी राजनीतिक दबाव का परिणाम था। अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव न हो तो 70 फीसदी क्राइम पहले दिन से कंट्रोल किया जा सकता है।

अब बढ़ गया है राजनीतिक दखल

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वर्ष 1977 बैच बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी रामअवतार बताते हैं कि पिछले कुछ साल में सिविल सर्विस और पुलिस सर्विस में राजनीतिक दखल काफी बढ़ गया है।

वर्ष 1995 में रिटायर्ड हुए रामअवतार के अनुसार जिस समय वह नौकरी करते थे उस समय भी नेता सिफारिशें लेकर आते थे, मगर जो आईपीएस उसूलों पर अडिग रहते थे और सिफारिशें नहीं मानते थे उन पर इस प्रकार का दबाव नहीं होता था।

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