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एक्सक्लूसिव: बिना लाइसेंस ही दिल्ली सरकार ने खोल दिया बोन बैंक

Sun, 10 Jun 2018 12:43 PM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 10 Jun 2018 12:43 PM IST
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without license delhi health minister Satyendra Jain inaugurate the first bone bank
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री - फोटो : अमर उजाला
नियमों को ताक पर रखकर दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) में शनिवार को सरकार ने बगैर लाइसेंस और रेडिएशन वाला बोन बैंक खोल दिया। जबकि इसके लिए बाकायदा राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) और भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर से मंजूरी लेनी पड़ती है। 
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लेकिन अस्पताल ने अभी तक आवेदन ही नहीं किया है। खास बात यह है कि इस मामले में खुद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का कहना है कि लाइसेंस बाद में आ जाएगा। लाइसेंस मिलने तक हड्डियां इस्तेमाल में नहीं लाई जाएंगी। ऐसे में सवाल यह है कि फिर बोन बैंक को बगैर इजाजत अभी खोलने की क्या जरूरत? इसका जवाब न मंत्री जैन से मिला और न ही अस्पताल प्रबंधन से।             
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क्या है नियम
नोटो के निदेशक डॉ. विमल भंडारी के अनुसार, बोन बैंक या अन्य किसी तरह के मानव अंग से जुड़े बैंक को खोलने का स्वास्थ्य विभाग को अधिकार है, लेकिन अगर किसी को लाइसेंस विभाग देता है तो इसकी जानकारी नोटो को भी देनी होगी। अगर बोन बैंक है तो लाइसेंस के अलावा भाभा सेंटर से रेडिएशन की मंजूरी लेनी होती है। इसके बाद ही बोन बैंक में हड्डियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाकायदा गाइड लाइंस भी बनी हुई हैं। डॉ. भंडारी के मुताबिक, उन्हें लाइसेंस की जानकारी नहीं मिली है।             
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नहीं मिला कोई आवेदन 

without license delhi health minister Satyendra Jain inaugurate the first bone bank
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री - फोटो : अमर उजाला
भाभा सेंटर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि अभी तक सिर्फ मुंबई स्थित टाटा अस्पताल में पूरे नियमों के साथ बोन बैंक और रेडिएशन संचालित है। दिल्ली की बात करें तो एम्स में रेडिएशन सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि भाभा के पास कोई आवेदन नहीं आया है। 

दरअसल, हड्डियों को रेडिएशन से साफ कर इस्तेमाल में लाया जाता है। जिसकी वजह से करीब एक किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। इसलिए मंजूरी मिलने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि बीते दिनों सफदरजंग अस्पताल में रेडिएशन की मंजूरी ठुकरा दी गई थी।       

क्या कहते हैं मंत्री जैन
बोन बैंक को लेकर सवालों पर मंत्री जैन का कहना है कि भाभा को अभी निरीक्षण करना है। लेकिन उनकी तरफ से देरी हो रही है। जल्द ही लाइसेंस और रेडिएशन का इंतजाम हो जाएगा। तब तक यहां सिर्फ हड्डियों को रखा जाएगा। लाइसेंस मिलने के बाद ही इनका इस्तेमाल किया जाएगा।     

हड्डियों का भी होता है दान

जानकारी के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की सड़क हादसे या अन्य दुर्घटना में मृत्यु होती है तो उसके शव को दान में दिया जा सकता है। शव से निकलने वाली हड्डियों को पहले अच्छी तरह साफ कर -80 डिग्री पर रखा जाता है।

कोई बीमारी न फैले इसलिए हड्डी पर ज्यादा क्षमता वाली रेडिएशन दी जाती है। इसके बाद वापस उसी तापमान में छह माह तक रखा जाता है। बाद में एचआईवी जांच कर इसे मरीज में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। 
 
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