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विमान पर चढ़ने से रोका तो जीत लाया विंबलडन

Tue, 14 Jul 2015 04:47 PM IST
Updated Tue, 14 Jul 2015 04:47 PM IST
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wimbeldon junior doubles winner sumit nagal was restrict to board flight for wimbeldon

सुरेश बताते हैं कि 2010 में अपोलो टायर्स ने टैलेंट हंट के सभी बच्चों को सहायता देना बंद किया तो अकेले सुमित को महेश भूपति ने अपनाया।

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तब से वह उनका सारा खर्च उठा रहे हैं। पहले उन्होंने सुमित को कनाडा के कोच बॉबी महल के पास भेजा और फिर इसी साल डेलफीनो के संरक्षण में जर्मनी की शटलर वास्के टेनिस अकादमी भेजा।
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कहा था जीत कर आऊंगा
सुरेश के मुताबिक सिंगल्स में हारने के बाद सुमित पहली बार डबल्स में भाग ले रहे थे। उसने फोन पर कहा था चिंता मत करो जीत कर आऊंगा। उसने वाकई में ऐसा कर दिखाया है।

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महज दो दिन पहले मिला था वीजा

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विंबलडन जूनियर सिंगल्स में सुमित नागल के पहले दौर का मुकाबला चार जुलाई को था। महज दो दिन पहले उन्हें लंदन के लिए वीजा मिला।

तीन जुलाई को सुबह सवा सात बजे सुमित लंदन जाने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर थे, लेकिन उन्हें फ्लाइट पर चढ़ने से रोक दिया गया।

एक एयरलाइंस ने उन्हें यह कहकर बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया कि वह नाबालिग हैं और बिना कोच के हवाई जहाज में नहीं बैठ सकते। इसके बावजूद कई प्रयासों के बाद सुमित विंबलडन में पहुंचे और खिताब भी जीता।

मैच वाले दिन ही लंदन पहुंचे थे सुमित

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सुमित के परिजनों ने गुहार लगाई कि उसे विंबलडन में खेलना है, लेकिन एक नहीं सुनी गई। हारकर सुमित ने जर्मनी के अपने कोच मिरीनोव डेलफीनो से बात की।

कोच ने कहा कि जर्मनी का टिकट कराओ, वह यहीं रुक रहे हैं। दोपहर बाद ऐसी विदेशी एयरलाइंस में उनका टिकट कराया गया जिसमें नाबालिग के नहीं जाने की प्रतिबद्धता नहीं थी।

जर्मनी में उन्होंने कोच को साथ लिया और मैच की सुबह चार जुलाई को लंदन पहुंचे, लेकिन इसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। वह कड़े संघर्ष में पहले दौर का ही मुकाबला हार बैठे।

जूनियर में सुमित की वर्ल्ड रैंकिंग है 20

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दिल्ली के नांगलोई इलाके के एक प्राइमरी स्कूल में टीचर सुमित के पिता सुरेश नागल को खुशी है कि उनके बेटे ने विंबलडन डबल्स जूनियर का खिताब जीता, लेकिन मन में टीस भी है कि अगर वह समय से लंदन पहुंचे होते तो सिंगल्स में भी कुछ कर सकते थे।

सुरेश ने कहा कि सुमित को सीधे लंदन पहुंचना था, जबकि उनके कोच जर्मनी से वहां पहुंचते, लेकिन फ्लाइट पर बैठने से रोके जाने के चलते ऐसा नहीं हो सका। सुरेश के अनुसार जूनियर में सुमित की वर्ल्ड रैंकिंग 20 है।

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