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बैन से थम जाएगी बीपीओ-केपीओ की रफ्तार, एनजीटी के फैसले से होगी परेशानी
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Tue, 19 Jul 2016 12:46 AM IST
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दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा डीजल वाहनों पर प्रतिबंध से साइबर सिटी के आईटी हब की रफ्तार थम जाएगी। यहां चलने वाले बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउट सोर्सिंस)-केपीओ (नॉलेज प्रोसेस आउट सोर्सिंग) समेत कॉल सेंटर और आईटी कंपनियों में काम करने वालों कर्मचारियों की आवाजाही प्रभावित होने का सीधा असर कंपनियों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
बीपीओ में काम करने वालों की आवाजाही का सबसे बड़ा जरिया कैब है। यहां चलने वाली करीब 30 हजार कैब में 65 फीसदी डीजल इंजन वाली हैं। एनजीटी के फैसले से डीजल कैब के पहिये थम जाएंगे।
गुड़गांव में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और बहादुरगढ़ से हर दिन हजारों लोग आते हैं। इन शहरों से आने-जाने वाले बीपीओ कर्मचारियों को अपने कार्यालय और फिर घर तक पहुंचने का संकट खड़ा हो जाएगा।
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सबसे अधिक परेशानी नाइट शिफ्ट वालों को होगी। रात की शिफ्ट में करीब 20 हजार महिलाएं गुड़गांव के बीपीओ में काम करती हैं, उन्हें घर छोड़ने में परेशानी होगी।
जानकारों का कहना है कि बीपीओ कंपनियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत नाइट शिफ्ट को लेकर है। यहां के बीपीओ में यूएसए शिफ्ट में सबसे अधिक काम होता है।
ऐसे में रात के समय कैब के अलावा बीपीओ कंपनियों के पास और कोई साधन नहीं हैं। हार्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि यूएसए शिफ्ट शाम 6:30 बजे से रात 3:30 बजे तक होती है। इतनी रात में कर्मचारियों को ड्रॉप करने के लिए कैब के अलावा कोई और साधन नहीं है।
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बीपीओ में काम करने वालों की आवाजाही का सबसे बड़ा जरिया कैब है। यहां चलने वाली करीब 30 हजार कैब में 65 फीसदी डीजल इंजन वाली हैं। एनजीटी के फैसले से डीजल कैब के पहिये थम जाएंगे।
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गुड़गांव में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और बहादुरगढ़ से हर दिन हजारों लोग आते हैं। इन शहरों से आने-जाने वाले बीपीओ कर्मचारियों को अपने कार्यालय और फिर घर तक पहुंचने का संकट खड़ा हो जाएगा।
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सबसे अधिक परेशानी नाइट शिफ्ट वालों को होगी। रात की शिफ्ट में करीब 20 हजार महिलाएं गुड़गांव के बीपीओ में काम करती हैं, उन्हें घर छोड़ने में परेशानी होगी।
जानकारों का कहना है कि बीपीओ कंपनियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत नाइट शिफ्ट को लेकर है। यहां के बीपीओ में यूएसए शिफ्ट में सबसे अधिक काम होता है।
ऐसे में रात के समय कैब के अलावा बीपीओ कंपनियों के पास और कोई साधन नहीं हैं। हार्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि यूएसए शिफ्ट शाम 6:30 बजे से रात 3:30 बजे तक होती है। इतनी रात में कर्मचारियों को ड्रॉप करने के लिए कैब के अलावा कोई और साधन नहीं है।
जानिए क्या होगा बैन का असर
एनजीटी
सीएनजी कैब की कमी
ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर कंपनी के अधिकारी अभिमन्यु सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को भेजने के लिए वेंडरों को साल भर का ठेका दिया जाता
है। वेंडरों के पास पर्याप्त सीएनजी कैब नहीं है। दिन में तो मेट्रो का सहारा लिया जा सकता है, मगर रात की शिफ्ट में काम करने वालों के लिए दिक्कत
बढ़ जाएगी। उन्हें छोड़ने की जिम्मेदारी कंपनी की है।
1.5 लाख लोग होंगे प्रभावित
जानकारों की मानें तो इस आदेश का असर दिल्ली-एनसीआर में करीब 1.5 लाख मुसाफिरों पर पड़ेगा। अधिकांश कैब सीएनजी से चलती है, जो
दिल्ली या एनसीआर के जिले में रजिस्टर्ड हैं।
दिल्ली में प्रतिबंध के बाद दूसरे शहरों से आने वाली गाड़ियों पर भी प्रतिबंध लग जाएगा। ऐसे में मेट्रो और
अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दबाव बढ़ेगा। जिले में दस वर्ष से पुरानी 83,757 गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं।
आईटी-बीपीओ सेक्टर एक नजर में
- बीपीओ की संख्या 600 है, जिसमें से तकरीबन 80 बड़ी हैं
- आईटी-बीपीओ में 1.50 लाख मैनपावर प्रत्यक्ष तौर से कार्यरत हैं
- लगभग 125 कॉल सेंटर
- बीपीओ सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी करीब 50 फीसदी
- आईटी सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी 17 प्रतिशत
समाधान
- सबसे पहले सीएनजी पंपों की संख्या बढ़ाई जाए। इसकी एनओसी देने में तेजी लाई जाए।
- आईटी, बीपीओ कर्मियों की शिफ्ट के मुताबिक मेट्रो परिचालन किया जाए।
- आईटी, बीपीओ, केपीओ कंपनियों को नियमों में ढील दी जाए।
ऑनलाइन इंश्योरेंस एग्रीगेटर कंपनी के अधिकारी अभिमन्यु सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को भेजने के लिए वेंडरों को साल भर का ठेका दिया जाता
है। वेंडरों के पास पर्याप्त सीएनजी कैब नहीं है। दिन में तो मेट्रो का सहारा लिया जा सकता है, मगर रात की शिफ्ट में काम करने वालों के लिए दिक्कत
बढ़ जाएगी। उन्हें छोड़ने की जिम्मेदारी कंपनी की है।
1.5 लाख लोग होंगे प्रभावित
जानकारों की मानें तो इस आदेश का असर दिल्ली-एनसीआर में करीब 1.5 लाख मुसाफिरों पर पड़ेगा। अधिकांश कैब सीएनजी से चलती है, जो
दिल्ली या एनसीआर के जिले में रजिस्टर्ड हैं।
दिल्ली में प्रतिबंध के बाद दूसरे शहरों से आने वाली गाड़ियों पर भी प्रतिबंध लग जाएगा। ऐसे में मेट्रो और
अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दबाव बढ़ेगा। जिले में दस वर्ष से पुरानी 83,757 गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं।
आईटी-बीपीओ सेक्टर एक नजर में
- बीपीओ की संख्या 600 है, जिसमें से तकरीबन 80 बड़ी हैं
- आईटी-बीपीओ में 1.50 लाख मैनपावर प्रत्यक्ष तौर से कार्यरत हैं
- लगभग 125 कॉल सेंटर
- बीपीओ सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी करीब 50 फीसदी
- आईटी सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी 17 प्रतिशत
समाधान
- सबसे पहले सीएनजी पंपों की संख्या बढ़ाई जाए। इसकी एनओसी देने में तेजी लाई जाए।
- आईटी, बीपीओ कर्मियों की शिफ्ट के मुताबिक मेट्रो परिचालन किया जाए।
- आईटी, बीपीओ, केपीओ कंपनियों को नियमों में ढील दी जाए।