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शहीद-ए-आजम को दस्तावेजों में शहीद मानने से क्यों डरी सरकार?

Sun, 14 Jun 2015 07:30 PM IST
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद
ओम प्रकाश/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sun, 14 Jun 2015 07:30 PM IST
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Why the government is afraid to accept the martyr to Shaheed-e-Azam?

आजादी की लड़ाई में अपनी जान न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए भगत सिंह के वंशज यादवेंद्र सिंह संधू ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर सरकार के समक्ष पहली बार अपनी लिखित मांग रखी।

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उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों ने गरम दल वालों को हमेशा हाशिए पर रखा। अब खुद को पिछली सरकारों से अलग साबित करने के लिए मोदी सरकार के पास एक मौका है।
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कांग्रेस में तत्कालीन गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर उन्हें मिलने का वक्त नहीं दिया था। लेकिन इस सरकार ने बृहस्पतिवार को उन्हें समय दिया। संधू ने कहा कि अब गेंद सरकार के पाले में है। हमने सरकार को पूरा समय दिया है।

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पूरा देश शहीद-ए-आजम मानता है दस्तावेज क्यों नहीं?

Why the government is afraid to accept the martyr to Shaheed-e-Azam?

क्रांतिकारियों को शहीद न घोषित करना अन्याय है। इस पर राजनाथ सिंह ने साफ-साफ कुछ न कहकर आश्वासन दिया कि भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों को शहीद घोषित करने के मसले पर सरकार संजीदा है।

सरकार इस मांग को पूरा करने की कोशिश करेगी। चूंकि यह मामला गृह मंत्रालय से जुड़ा है, इसलिए संधू ने गृहमंत्री से मिलने का वक्त मांगा था। संधू इससे पहले एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी यह मांग कर चुके हैं।

संधू ने बताया कि क्रांतिकारियों के वंशज एक साझा मोर्चा बनाकर इस मुद्दे पर लड़ाई लड़ रहे हैं। इसका नेतृत्व ऑल इंडिया शहीद भगत सिंह ब्रिगेड कर रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा देश जिसे शहीद-ए-आजम मानता है। सरकार उसे दस्तावेजों में शहीद घोषित करने से डर रही है।

'सरकारें अंग्रेजों की मानसिकता से काम कर रही हैं'

Why the government is afraid to accept the martyr to Shaheed-e-Azam?

तिरंगे के लिए जान न्योछावर करने वालों को दस्तावेजों में शहीद न मानना दुर्भाग्यपूर्ण है। गौरतलब है कि शहीद सुखदेव के पौत्र अनुज थापर भी कह चुके हैं कि अभी भी सरकारें अंग्रेजों की मानसिकता से काम कर रही हैं। इसलिए क्रांतिकारियों को अब तक शहीद का दर्जा नहीं मिला।

राष्ट्रीय स्तर पर उठ चुका है मामला- ‘अमर उजाला’ द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में डाली गई एक आरटीआई के जवाब पर शहीद भगत सिंह ब्रिगेड ने राष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा उठाया था। जिसमें मंत्रालय ने कहा था कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा देने संबंधी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।

अमर उजाला ने सबसे पहले 21 जुलाई 2013 को ‘भगत सिंह के सम्मान पर गृह मंत्रालय को दिलचस्पी नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। यह मामला संसद में भी उठ चुका है।

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