हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और डीएमआरसी से पूछा, मेट्रो किराये में छूट क्यों नहीं
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हाईकोर्ट ने मेट्रो किराये में सब्सिडी देने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार व दिल्ली मेट्रो से जवाब मांगा है। प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने याचिका दायर कर मेट्रो किराये में सब्सिडी देने की मांग की है। उनका कहना है कि राजधानी में प्रदूषण कम करने में मेट्रो का अहम योगदान रहा है। उसका किराया अधिक होने से यात्री यातायात के दूसरे साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव वी खंडपीठ ने दिल्ली सरकार व दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को नोटिस जारी कर 27 सितंबर तक जवाब मांगा है।
पेश याचिका में आरटीआई के हवाले से अजय माकन ने कहा है कि मेट्रो ने मई व अक्तूबर 2017 में किराया बढ़ाया। इससे मेट्रो के दैनिक यात्रियों की संख्या में तीन लाख की गिरावट आई। इस कारण अब मेट्रो को करीब 755 करोड़ रुपये की सालाना आय हो रही है।
याचिका में कहा गया है कि डीटीसी के बेड़े में बसों की भारी कमी है, जिससे लोग मेट्रो में यात्रा करते थे। लेकिन मेट्रो के किराये में दो बार हुई वृद्धि के कारण यात्री यातायात के दूसरे साधनों की ओर जा रहे हैं। मेट्रो किराये में छूट देने के लिए सरकार निधि का निर्माण करे, ताकि मेट्रो की यात्रा छोड़ चुके यात्रियों को किराया कम कर वापस लाया जा सके। अगर राजधानी के लोगों को मेट्रो के किराये में छूट मिलेगी तो वह दूसरे साधनों को छोड़ कर मेट्रो से यात्रा करेंगे।