...इसलिए नाबालिग दोषी को मिलना चाहिए दूसरा मौका
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20 दिसंबर को ज्योति सिंह जिसे देश अब निर्भया के नाम से जानता है के साथ दरिंदंगी करने वाला नाबालिग दोषी बाल सुधार गृह से बाहर आ जाएगा।
ज्योति के मां-बाप से लेकर देश भर में इस नाबालिग की रिहाई पर हंगामा मचा हुआ है और हर ओर इस रिहाई को रोकने की मांग हो रही है।
असल में इस मांग का कारण एक मीडिया रिपोर्ट है जिसमें बताया गया कि निर्भया के साथ 12 दिसंबर 2011 की रात जो कुछ हुआ उसमें सबसे घृणित काम करने वाला यह नाबालिग ही था।
हालांकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले एचएक्यू सेंटर फॉर चाइल्ड राइट की संचालिका एनाक्षी गांगुली का कहना है कि नाबालिग के बारे में यह अफवाह केवल दिल्ली पुलिस के सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
उनका कहना है कि दिल्ली पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने जो चार्जशीट दाखिल की उसमें ऐसी किसी बात का दावा नहीं किया गया था।
पुलिस ने पास नहीं था कोई ठोस सबूत
गांगुली का कहना है कि खुद निर्भया ने अपने बयान और घटना की रात उसके साथ मौजूद उसके बॉयफ्रैंड ने इस नाबालिग का अलग से कोई जिक्र नहीं किया।
दोनों ने अपने बयान में ये कहीं नहीं कहा कि निर्भया के शरीर में लोहे की रॉड डालने वाला यही नाबालिग था। हां, ये बात सही है कि इस मामले में आरोपी और उस रात बस चला रहे राम सिंह ने अपने बयान में नाबालिग के बारे में अलग से कुछ बातें कहीं थीं।
नाबालिग के खिलाफ सबसे अहम सबूत खून में सनी शर्ट थी जिसके बारे में भी यह दावा किया गया कि यह राम सिंह की थी। गांगुली का कहना है कि इस नाबालिग के खिलाफ पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं थे।
वीर्य के निशान का भी नहीं हुआ मिलान
निर्भया के शरीर पर दांतों से काटे जाने के निशानों को मैच कराने के लिए भी नाबालिग के दांत के निशान नहीं लिए गए थे। इसके अलावा निर्भया के शरीर और उसके कपड़ों पर वीर्य के जो अवशेष मिले उसका भी मिलान नाबालिग से नहीं हुआ था।
गांगुली का कहना है कि शायद दिल्ली पुलिस को आभास था कि वो नाबालिग आरोपी को ज्यादा सजा नहीं दिलवा पाएंगे। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने आदेश में कहा था कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि निर्भया के साथ नाबालिग ने सबसे हिंसक व्यवहार किया था।
इसके बावजूद नाबालिग को मौजूदा कानून में सबसे कठोर सजा दी गई क्योंकि वह एक घृणित घटना का हिस्सा था और उस वक्त वहां मौजूद था।
गांगुली का कहना है कि उसके खिलाफ कमजोर सबूत इस बात का संकेत हैं कि उसे सुधरने का एक और मौका मिलना चाहिए।