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...तो साफ-सुथरी आबोहवा क्यों नहीं बनती चुनावी मुद्दा, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल दिल्ली

Sun, 31 Mar 2019 02:08 AM IST
शाहरुख खान संतोष कुमार, अमर उजाला, दिल्ली
संतोष कुमार, अमर उजाला, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 31 Mar 2019 02:08 AM IST
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Why is not air pollution Electoral issue Delhi is among the most polluted cities in world
फाइल फोटो
देश की सबसे ऊंची अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली के वायु प्रदूषण पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हम दो, हमारे दो का सिद्धांत वाहनों पर भी क्यों लागू न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट समेत एनजीटी ने इस मामले में दिल्ली व केंद्र की सरकार को कई बार फटकार भी लगा चुका है। 
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बावजूद इसके जिस हवा पर दिल्लीवालों की सांस टिकी है, सियासी बहसों में वही हाशिए पर है। 2019 के चुनावी महाभारत में राजनीतिक दलों के साथ आम दिल्लीवासी भी वायु प्रदूषण के मसले पर खामोश हैं। यह तब है जब दिल्ली दुनिया का सबसे अधिक प्रदूषित शहर है। 
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वायु प्रदूषण की फिक्र दिवाली के नजदीक तभी होती है, जब दिल्ली में सांस लेना नामुमकिन सा हो जाता है। मौसम के गर्म होते ही होली तक सब इसे भूल जाते हैं। 

फिर, इस मसले पर बेफिक्री की लंबी चादर पड़ जाती है। जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि कि वायु प्रदूषण ऐसा विषय है, जो हम सबकी जिंदगी से सीधे से जुड़ा है। साथ ही अगली पीढ़ी का भविष्य भी इसी पर ही निर्भर करेगा।
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प्रदूषण के मामले में दिल्ली अव्वल बनाम सरकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन की पिछली सर्दियों की एक रिपोर्ट बताती है कि 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की लिस्ट में दिल्ली समेत भारत के नौ शहर शामिल हैं। दिल्ली में मानव शरीर के लिए सबसे खतरनाक पीएम 2.5 की वार्षिक सघनता सबसे ज्यादा है। 

इसके बावजूद दिल्ली सरकार के पास वायु प्रदूषण का विस्तृत आंकड़ा नहीं है। हालात बेकाबू होने पर सरकार ने पिछले साल इसका आंकड़ा जुटाने के लिए एक कमेटी का गठन किया। 

आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट निजी वाहनों को दिल्ली के प्रदूषण की बड़ी वजह बताती है। बावजूद इसके सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हालांकि, दिल्ली सरकार ऑड-ईवन जैसे अस्थाई विकल्पों को आजमा चुकी है। लेकिन हालात में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।

प्रदूषण की बड़ी वजहें:

. निजी, बड़े और भारी वाहनों से होने वाला उत्सर्जन
. पंजाब और हरियाणा के किसानों का पराली जलाना
. दिल्ली एनसीआर में चल रहा भारी निर्माण कार्य
. मौसमी बदलाव, जिससे वायु में प्रदूषण के कण हवा में फंस जाते हैं।
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 वायु प्रदूषण के संघटक
. पीएम 2.5, पीएम 10, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन, आयरन, मैगनीज, बैरीलियम, निकेल

दिल्लीवालों में वायु प्रदूषण को लेकर जिस स्तर की चेतना होनी चाहिए, वह अभी दूर-दूर तक नहीं दिखती। वायु प्रदूषण का समाधान सियासत से ही निकलेगा। और यह चुनाव का वक्त ही है, जब इसके लिए राजनीतिक दलों पर दबाव बनाया जा सकता है। 

अभी हमलोग राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्रों का इंतजार कर रहे हैं। इसके आने के बाद इसकी खामियों व खूबियों पर आम दिल्लीवालों से भी बात की जाएगी। - अनुमिता राय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई 

दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर दिवाली से होली के बीच रहता है। सबसे बुरी हालत नवंबर-दिसंबर में होती है। इस वक्त, जब दिल्ली समेत पूरे देश का सियासी तापमान बढ़ा हुआ है तो गरम मौसम में वायु प्रदूषण की चादर भी छंट गई है। 

संभव है कि सर्दियों में चुनाव होने से वायु प्रदूषण पर लोग खुलकर चर्चा करते। हालांकि, इस बारे में कोई अध्ययन नहीं किया गया है। -  डॉ. प्रदीप्तो घोष, वायु प्रदूषण विशेषज्ञ, टेरी

23 मई को पता चलेगा कि पांच सालों तक देश की कमान किन हाथों में होगी। लेकिन दिल्लीवालों के लिए सवाल यही है कि क्या इससे उनकी जिंदगी बेहतर होगी। लोगों की सांसें घटते ओर बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच हिचकोले तो नहीं खाएगीं। यह सवाल आज की पीढ़ी के लिए भी अहम है और आने वाले पीढ़ियों को भविष्य भी साफ-सुथरी आबोहवा पर ही टिका है। - प्रशांत कुमार, वायु प्रदूषण विशेषज्ञ, इकोस्फीयर
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