सूरजकुंड मेला : बिना वन विभाग की अनुमति काट दिए हरे पेड़
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अरावली की पहाड़ियों में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का विस्तार करने के लिए बनाई जा रही नई हट्स और दीवार के आड़े आ रहे हरे पेड़ों की ही हत्या कर दी जा रही है। बताया जाता है कि पेड़ों को काटने के लिए पर्यटन विभाग ने वन विभाग से अनुमति लेना भी जरूरी नही समझा। 20 साल से ज्यादा पुराने पेड़ काटकर यहां नई हट्स बनाने की तैयारी की जा रही है। इससे अरावली की वादियों की खूबसूरती बर्बाद हो रही है।
पेड़ काटे जाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी 2016 में भी बड़ी चौपाल के पीछे दस नई हट्स बनाई गई थी। इसके लिए भी पेड़ काटे गए थे। लेकिन उस मामले में भी कोई कार्रवाई आज तक नही हुई। मेले में फूड कोर्ट के पास इस बार 50 से ज्यादा नई हट्स बनाई जा रही हैं।
सोमवार को खुद पर्यटन और अन्य सरकारी विभाग के अधिकारी मेले की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। अधिकारी तैयारियों का जायजा ले रहे थे और दूसरी तरफ पेड़ काटने का सिलसिला भी जारी था। अरावली की वादियों की खूबसूरती को देखते हुए अंग्रेजों ने सन 1900 में इन वादियों के संरक्षण के लिए सेक्शन चार लगाया था।
अरावली की वादियों में पेड़ काटना अपराध है
मुख्य मुख्य संसदीय सचिव (पर्यटन) सीमा त्रिखा ने कहा, मुझे इसके बारे में जानकारी नही है। अगर ऐसा हुआ है तो विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ रेंज ऑफिसर, वन विभाग गुरमेल सिंह ने कहा, मुझे इसकी जानकारी नही है। मै खुद मौकेे पर जाकर जांच करूंगा और नोटिस भेज कर संबधित विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
सेव अरावली संस्थान के सदस्य जितेंद्र भड़ाना कहते हैं कि अरावली की वादियों में पेड़ काटना अपराध है। अगर कोई पेड़ काटता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वन विभाग के अधिकारी जान बूझकर कार्रवाई नही करते।