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हल्की सी बारिश में क्यों उफन जाती है दिल्ली, जलाशयों पर अवैध कब्जे की कीमत चुका रही राजधानी

Mon, 17 Aug 2020 07:07 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 17 Aug 2020 07:07 PM IST
सार

  • जलाशयों पर कब्जे, अवैध निर्माण के कारण पानी सोखने की जगह नहीं बची, इसलिए थोड़ी सी बारिश भी पड़ जाती है भारी              
  • जलाशयों के घटने से भूजल स्तर में लगातार आई गिरावट, बढ़ रही पानी की किल्लत

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Why Delhi flooded in light rain, the capital is paying the price of illegal construction of water reservoirs
delhi ncr rain - फोटो : ANI (File)

विस्तार

तालाब हमारे पर्यावरण का अहम हिस्सा होते हैं। इनके जरिए जमीन के नीचे गए पानी से भूजल स्तर बना रहता है तो साथ ही इसके आसपास जैवीय विविधतता भी विकसित होती है। लेकिन गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने वाली दिल्ली अपने तालाबों के रखरखाव के प्रति बिलकुल उदासीन है।

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इसके ज्यादातर तालाबों पर अवैध कब्जा हो चुका है तो कई गंदे नाले का निकास स्थान बनकर रह गए हैं। आलम यह है कि कभी हजारों तालाबों से गुलजार रहने वाली दिल्ली में अब पांच सौ से भी कम ऐसे तालाब बचे हैं, जिनको पुनर्जीवित कर दिल्लीवालों के लिए पानी का इंतजाम किया जा सकता है।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 में दिल्ली में 794 तालाबों का सर्वे किया गया था। सर्वे में पाया गया कि इनमें से ज्यादातर तालाबों पर अवैध कब्जा हो चुका है। स्वयं दिल्ली सरकार ने भी हाईकोर्ट में 629 तालाबों के होने की बात मानी थी, लेकिन इनमें 453 को ही पुनर्जीवित करने लायक बताया था। शेष पर या तो अवैध निर्माण हो चुका था तो कहीं उनकी जमीन को अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल कर लिया गया था।
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सबसे बुरी स्थिति डीडीए के अधिकार क्षेत्र में आने वाले जलाशयों की पाई गई थी। डीडीए के अंतर्गत कम से कम 156 तालाब आते थे, लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर बनी कमेटी ने अपनी 2019 की रिपोर्ट में बताया था कि इनमें से 44 तालाब कभी भी पुनर्जीवित नहीं किए जा सकेंगे क्योंकि इन तालाबों की जगह पर अवैध अतिक्रमण के साथ-साथ कई सरकारी विभागों के स्थायी निर्माण किए जा चुके हैं।
 
दिल्ली हाईकोर्ट ने इन 453 जलाशयों को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया था, लेकिन लंबे समय तक इस आदेश पर भी कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ। इसका परिणाम हुआ कि दिल्ली में पानी की मांग और उपलब्धतता के बीच लगातार फासला बढ़ता चला गया।  
 
दिल्ली जल बोर्ड ने 2020 में 250 जलाशयों को पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जन्मदिन (16 अगस्त) को इनमें से एक तालाब को पुनर्जीवित करने का काम शुरू कर दिल्ली के जलस्तर को सुधारने का काम शुरू किया गया है। दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने इस कार्य का उद्घाटन किया।

चड्ढा का कहना है कि इन तालाबों के बनने से बारिश में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं उत्पन्न होगी, साथ ही गर्मी में लोगों की प्यास बुझ सकेगी। फिलहाल जल बोर्ड के पास दिल्ली के बाकी तालाबों को पुनर्जीवित करने की कोई योजना नहीं है।

यहां हो गया है स्थायी निर्माण

पूर्वी दिल्ली के विनोद नगर इलाके में पहले एक तालाब हुआ करता था। अब डीडीए ने यहां पर पार्क विकसित कर दिया है। बताया गया है कि राजीव गांधी अस्पताल को बनाने के लिए भी इसके पास के एक बड़े तालाब की जमीन को इस्तेमाल कर लिया गया है। इसी प्रकार धौलापुरा के एक जलाशय की जमीन पर फैसिलिटी सेंटर बना दिया गया है।
 
इसी प्रकार दक्षिण के पॉश इलाके मुनिरका के पास एक जलाशय पर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स विकसित कर दिया गया है तो महिपालपुर का तालाब भी नक्शे से गायब हो चुका है। इसी तरह नॉर्थ जोन के गोपालपुर के जलाशय की जमीन पर बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित कर दिया गया है।

पानी की कितनी जरूरत

दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 1140 एमजीडी पानी की जरूरत होती है। दिल्ली जल बोर्ड का दावा है कि वह लगभग 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति करता है। इस प्रकार रोजाना लगभग 250 एमजीडी पानी की कमी होती है।



यह कमी पानी टैंकर माफियाओं द्वारा पूरी कराई जाती है। इसकी कीमत आनंद पर्वत, करोल बाग, तिमारपुर, इंद्रपुरी जैसे इलाकों के गरीब लोगों को भारी रकम देकर चुकानी पड़ती है।

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